राम त्रिपाठी, गाजीपुर बॉर्डर रात में कंपकंपाती ठंड से बचना प्रदर्शनकारी किसानों से लेकर सुरक्षाकर्मियों तक के लिए चुनौती बना हुआ है। किसान अलाव जलाकर गुजारा कर रहे हैं। पुलिस के लिए वॉटरप्रूफ टेंट लगाए गए हैं। सबसे बड़ी समस्या अर्धसैनिक बलों के सामने है। सुरक्षा के लिए 5 कंपनी अर्धसैनिक बल यहां तैनात किए गए हैं। उनमें बीएसएफ, सीआईएसएफ और आरएएफ आदि शामिल हैं। उनके पास ठंड से बचने के लिए न तो अलाव है और न ही वॉटरप्रूफ टेंट। वे रात में भी बैरिकेड्स के पीछे और तय स्थानों पर खड़े रहते हैं। जवानों ने कहा कि यह उनकी ड्यूटी का हिस्सा है। यूं ही खड़े रहना पड़ता है। ठिठुरती ठंड हो या मूसलाधार बारिश। उनका कहना था कि उनकी ट्रेनिंग ही ऐसी है कि जहां जगह तय की गई है, वहां वे तैनात रहेंगे। एक जवान ने बताया कि तबीयत भी खराब होती है। बुखार, सर्दी-जुकाम से भी पीड़ित होते हैं। उस स्थिति में दवा मिलती है। दवा लेने के बाद उन्हें ड्यूटी पर तैनात रहना पड़ता है। दिल्ली पुलिस की मदद के लिए धरनास्थल सड़क पर 3 और फ्लाइओवर पर 2 वॉटरप्रूफ टेंट लगाए गए हैं, लेकिन वे चारों तरफ से कवर नहीं हैं। सामने की तरफ कोई पर्दा भी नहीं है। पुलिस का कहना है केवल ओस से बचाव हो पाता है। सारे सिपाही एकसाथ टेंट में नहीं रह सकते हैं। काफी सिपाहियों को ड्यूटी के कारण टेंट के बाहर ही रहना पड़ता है। किसानों के पास भी ठंड से बचाव के कोई पुख्ता साधन नहीं हैं। 4-5 अलाव जरूर रात में जलते हैं। किसान जोगिंदर चौधरी बताते हैं कि अलाव एक बहाना है। इसी के सहारे 10-15 किसान एकसाथ बैठ जाते हैं और किसी तरह ठंड में रात गुजारते हैं। हुक्का भी रात गुजारने का साधन है। किसानों का कहना है कि जज्बा ही उनका सहारा है। खेतों में भी वे इसी प्रकार रहते हैं।
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