बठिंडा केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों का विरोध प्रदर्शन नहीं थम रहा है। रविवार को इन किसानों ने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी गई। एक तरफ जहां किसानों को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ पंजाब के बठिंडा जिले में एक किसान ने कर्ज से दबे होने के कारण आत्महत्या कर ली। किसान धायलपुर मिर्जा गांव के 23 वर्षीय गुरलाभ सिंह थे। उन्होंने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। वह शुक्रवार को दिल्ली सीमा पर चल रहे किसानों के प्रदर्शन में शामिल होकर लौटे थे। गुरलाभ सिंह के परिवार पर बैंक और सूदखोरों का लगभग 6 लाख रुपये बकाया था। उनके मामा हरनेक सिंह ने कहा कि जिस तरह से सरकार किसानों के संघर्ष का जवाब दे रही थी, उससे गुरलाभ खुश नहीं थे। उसने कहा कि वह कर्ज नहीं चुका सकता, लेकिन मर सकता है। यह कहकर उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। शनिवार को खाया जहर पुलिस के मुताबिक, गुरलाभ ने शनिवार को जहर पी लिया और उसे बठिंडा के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसने अगले दिन रविवार को अंतिम सांस ली। पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के पीछे के कारण का पता नहीं चल पाया है। किसान संगठन ने दी श्रद्धांजलि बीकेयू क्रांतिकारी के भगता ब्लॉक अध्यक्ष, बलजिंदर सिंह ने कहा कि गुरलाभ भी उन किसानों में से एक था जो नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने किसान के शोक संतप्त परिवार के लिए मुआवजे की मांग की। बलजिंदर सिंह ने कहा कि आंदोलन के दौरान कई किसानों की मौत हो गई है, सरकार को स्थिति की गंभीरता को समझना चाहिए और जल्द से जल्द कानूनों को रद्द करना चाहिए। रविवार को मनाया गया 'श्रद्धांजलि दिवस' आपको बता दें कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वालों को नमन करने के लिए पंजाब और हरियाणा में किसानों ने रविवार को 'श्रद्धांजलि दिवस' मनाया। किसान संगठनों ने दावा किया है कि आंदोलन में हिस्सा लेने वाले 30 से ज्यादा किसानों की अब तक विभिन्न कारणों से मौत हुई है, जिनमें सड़क हादसे और दिल का दौरा आदि शामल है। प्रदर्शनकारी किसानों ने अपने दिवंगत भाइयों की याद में दोनों राज्यों के कई गांवों में 'अरदास' (प्रार्थना) किया।
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