नई दिल्ली राजधानी और आसपास के इलाकों में ठंड का कहर बढ़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, इस हफ्ते न्यूनतम तापमान 9 डिग्री से गिरकर 7 डिग्री तक पहुंच सकता है। सोमवार सुबह दिल्ली-एनसीआर के कई इलाके बेहद घने कोहरे की चादर में ढके रहे। दृश्यता काफी कम है और 100 मीटर दूर देखने में भी परेशानी हो रही है। सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो चली है और लाइट्स ऑन करके चलना पड़ रहा है। बढ़ती ठंड का असर दिल्ली में जारी किसानों के आंदोलन पर भी देखने को मिल रहा है। बुजुर्ग प्रदर्शनकारियों में सर्दी की वजह से स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं सामने आ रही हैं। गिरा तापमान, अगले कई दिन रहेगी ठंड व कोहराशनिवार सुबह दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में बारिश के बाद तापमान में गिरावट महसूस की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कई दिन बढ़ी ठंड का अहसास बना रहेगा। अगले एक सप्ताह 2-3 दिन घना कोहरा छाए रहने के भी आसार हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी की वजह से अब वहां से चलकर हवाएं दिल्ली-एनसीआर की तरफ आ रही है, जिसकी वजह से सर्द है। इसका असर दो दिन तक बना रहेगा। संभावना जताई जा रही है कि 15 दिसंबर के बाद गलन वाली सर्दी और अधिक बढ़ जाएगी। इस साल पिछले सालों की अपेक्षा अधिक सर्दी पड़ने के भी आसार लगाए जा रहे है। कफ, कब्ज, लूज मोशन, ठंड की चपेट में आ रहे किसानयूपी गेट बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में नौजवानों के साथ बुजुर्ग किसान भी कई दिनों से डटे हुए हैं। दिन बीतने के साथ इनमें से कई किसान अब लूज मोशन, कब्ज के अलावा कफ व कोल्ड के शिकार हो रहे हैं। उनकी सेहत को देखते हुए अब हेल्प कैंप की संख्या बढ़ा गई है। साथ ही कई संगठनों की तरफ से इंतजाम किए गए हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनका चेकअप करती है और जरूरत पड़ने पर दवाइयां देती है। यहां तक कि एंबुलेंस भी तैनात है।हर रोज 120 मरीज कर रहे संपर्क धरना स्थल पर 5 हेल्थ कैंप चल रहे हैं। सभी कैंपों में दो सीनियर डॉक्टर रहते हैं। डॉक्टरों ने बताया कि अमूमन 120 से लेकर 150 मरीज हर रोज संपर्क करते हैं। उनमें से अधिकांश बुजुर्ग हैं, जो लूज मोशन, खांसी, जुकाम और ब्लड प्रेशर बढ़ने से परेशान हैं। उन्हें ठंड से बचने के साथ-साथ खानपान पर ध्यान देने के लिए कहा जा रहा है। समय पर खाना खाने की सलाह दी जा रही है। मौसम बदलने का भी कुछ असर है। कोहरे और ठंड में किसान कांपते रहे, इरादे अब भी मजबूतसिंघु बॉर्डर के पास धरना दे रहे लोगों के लिए सर्द हवाएं मानो किसी मुसीबत से कम नहीं, इसके बावजूद यहां प्रदर्शन कर रहे लोगों के जज्बे में कोई कमी देखने को नहीं मिली हैं। धरना स्थल से करीब 200 मीटर आगे कुंडली के तरफ खालसा ऐड की तरफ से अस्थाई रैन बसेरा है। यहां पर करीब 400 लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है। यहां आने वाले हर एक व्यक्ति का पहचान पत्र देखने के बाद एंट्री दी जाती है, सुरक्षा के लिए रैन बसेरे पंडाल में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। जिससे हर वक्त लोगों पर निगरानी भी रखी जाती है। ऐसे पंडाल कई जगह बने हुए है, जिसे कई संस्थों ने बनाए हुए है। 'ठंड झेल लेंगे, लेकिन मांगे पूरी होने तक वापस नहीं जाएंगे'कुछ दूर ट्रॉली के पास कुछ लोगों ने आग जलाई हुई थी, उससे अपने हाथ सेंक रहे थे। लुधियाना से पहुंचे जसप्रीत ने बताया कि उसे आज यहां पर 17 दिन हो गए हैं। जितनी ठंड आज है, इतनी शायद इससे पहले नहीं थी। कुछ दिन पहले ही यहां पर लोगों के सोने के लिए एक संस्था ने प्लास्टिक के गद्दे दिए थे, आज यह गद्दे बहुत काम आ रहे हैं। करीब 55 साल के जोगिंदर सिंह ने बताया कि ठंड हो या बारिश हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, हम अभी भी खुश हैं और इस ठंड को भी पार पा लेंगे लेकिन जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाएगी, हम वापस नहीं जाएंगे हम खुश हैं।
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