नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट में एक रूटीन वर्चुअल सुनवाई दो बहनों के लिए यादगार बन गई। अपनी पढ़ाई का खर्च जुटाने को संघर्ष कर रहीं इन बहनों की ओर वकीलों ने मदद का हाथ बढ़ाया। इन 10 वकीलों का पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है। फिर भी इन बहनों के सपने कहीं टूट न जाए, इसलिए उन्होंने आपस में चंदा करके तुरंत 1 लाख रुपये जुटा लिए। जज ने वकीलों के इस कदम की तारीफ की। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'याचिकाकर्ता और उनकी बेटियां निश्चित ही इस वित्तीय और भावुक मदद से अभिभूत हैं। अदालत बार के सदस्यों के प्रयास की सराहना करती है कि उन्होंने आर्थिक तंगी के चलते दो युवा छात्राओं की पढ़ाई ठप होने से बचा लिया।' फिलहाल जरूरत 87,400 रुपये की थी, मगर कोर्ट ने कहा कि 1,02,100 रुपये इकट्ठा किए जा चुके हैं। वकीलों से नहीं सुना गया महिला का दर्दयह वाकया तब हुआ जब इन बहनों की मां अदालत को बता रही थी कि कैसे उनकी पढ़ाई छूटने के कगार पर आ गई है। अलग रहने वाला पति अपनी बेटियों की पढ़ाई के लिए पैसा देने को तैयार नहीं है। महिला ने दावा किया कि उसके पति के पास सभी साधन हैं मगर वह कोई मदद को तैयार नहीं। कोर्ट मसले का हल सोच ही रही थी कि अपने केस का इंतजार कर रहे कई वकीलों ने आवाज उठाई। कहा कि वे दोनों लड़कियों की पढ़ाई में मदद करना चाहेंगे। फौरन चंदा इकट्ठा किया गया। अदालत ने सभी वकीलों के नाम दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। ...तो रुक जाती दोनों बहनों की पढ़ाईमहिला ने अदालत को बताया कि उनकी छोटी बेटी बीए-एलएलबी कर रही है और थर्ड ईयर में पढ़ती है। फीस न भर पाने की वजह से वह मिड-टर्म एग्जाम नहीं दे सकी। अब बढ़ी हुई फीस 10 जनवरी तक जमा करानी है नहीं तो साल बर्बाद हो जाएगा। उनकी बड़ी बेटी किसी इंस्टिट्यूट से सर्टिफिकेट कोर्स कर रही है मगर फीस न चुकाने की वजह से उसे एक्सटर्नल स्टूडेंट बना दिया गया है। अदालत ने यह भी नोट किया कि कानून की छात्रा को अभी चौथे और पांचवें साल में 60,000-60,000 रुपये फीस भरनी है। कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से मामले को देखने का आग्रह किया।
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