नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि करप्शन के मामले में सीबीआई को पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच (PE) रजिस्टर करना अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी अधिकार के तौर पर इसकी मांग नहीं कर सकता है कि सीबीआई एफआईआर से पहले पीई दर्ज कर ही छानबीन कर सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सीबीआई के लिए पीई दर्ज करना अनिवार्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें तेलंगाना हाई कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया था। हाई कोर्ट के आदेश को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि अगर सीबीआई को जानकारी मिलती है कि संज्ञेय अपराध हुआ है और पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ करप्शन का मामला है। वह सीधे करप्शन केस में एफआईआर दर्ज कर सकती है। सीबीआई के लिए जरूरी नहीं है कि वह एफआईआर से पहले पीई दर्ज करे। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर सीबीआई ने पीई दर्ज नहीं किया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि एफआईआर बेकार हो जाएगी। अदालत ने कहा कि सीबीआई अगर समझती है कि पीई की जरूरत नहीं है तो वह सीधे एफआईआर दर्ज कर सकती है और आरोपी इस बात की मांग नहीं कर सकता है कि एफआईआर से पहले पीई होना अनिवार्य है। मौजूदा केस में आय से अधिक संपत्ति का मामला था और सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। तेलंगाना हाई कोर्ट में जब मामला आया तो हाई कोर्ट ने यह कहते हुए केस खारिज कर दिया कि सीबीआई को एफआईआर से पहले पीई करना चाहिए था। सीबीआई ने इस मामले में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। सीबीआई ने अपनी दलील में कहा कि मैन्युअल के तहत एफआईआर से पहले पीई दर्ज करना अनिवार्य नहीं है। वहीं, दूसरी तरफ दलील दी गई कि पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ करप्शन केस या आय से अधिक संपत्ति के मामले में पहले पीई दर्ज होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल था कि अगर मामला पब्लिक सर्वेंट का हो तो क्या करप्शन केस में सीबीआई को पहले पीई दर्ज करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया और कहा कि सीबीआई के लिए पीई दर्ज करना अनिवार्य नहीं है।
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