नई दिल्ली उत्तराखंड में बीजेपी विधायकों ने संगठन का कितना काम किया और संगठन से दिए गए कार्यक्रमों में कितनी सक्रियता दिखाई, इस बारे में फीडबैक लिया जा रहा है। टिकट देने में इस फीडबैक को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसके साथ बीजेपी की राष्ट्रीय टीम विधानसभा क्षेत्रों में विधायक की इमेज को लेकर अलग से सर्वे करा रही है। उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव हैं। बीजेपी को एंटीइनकंबेंसी की काट ढूंढनी है। बीजेपी इसकी तैयारियों में जुटी हुई है। अगले महीने उत्तराखंड में एक रैली कर सकते हैं। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पीएम की यह रैली चुनाव की तारीख के ऐलान से पहले होगी। चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद पीएम की पांच रैलियां कराने की योजना है। हर लोकसभा क्षेत्र में एक रैली। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह की भी कम से कम दो रैली कराने की कोशिश की जाएगी। एक रैली गढ़वाल और एक कुमाऊं में होगी। उत्तराखंड बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, रैलियों के लिए योजना बनाने के साथ ही पार्टी संगठन के हिसाब से बीजेपी विधायकों की रिपोर्टिंग भी हो रही है। इसमें देखा जा रहा कि विधायकों को पार्टी ने जो कार्यक्रम दिए उसमें से उन्होंने कितने कराए और वे क्षेत्र में कितना सक्रिय हैं। यह भी देखा जा रहा है कि विधायक जनता के बीच कितना रहते हैं। बीजेपी के एक नेता के मुताबिक, उत्तराखंड में विधानसभा क्षेत्र के अंदर दो से लेकर पांच तक मंडल हैं। हर विधानसभा क्षेत्र में तीस से चालीस शक्ति केंद्र हैं। शक्ति केंद्रों के अलग अलग इंचार्ज बनाए गए हैं। चार या पांच पोलिंग सेंटर को मिलाकर एक शक्ति केंद्र बनता है। पूरे उत्तराखंड में 2,300 से ज्यादा शक्ति केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि हम शक्ति केंद्र से, बूथ की इकाई से, मंडलों से फीड बैक ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंडलों की भी पूरी कमिटी होती है। जिले की कमिटी होती है। जिले के पदाधिकारी जो उस विधानसभा क्षेत्र में रहते हैं हम उनसे फीडबैक ले रहे हैं। उत्तराखंड बीजेपी के एक दूसरे नेता ने कहा कि संगठन विधायकों को वक्त-वक्त पर संगठन का काम देता है। संगठन से ही विधायक बने हैं। हम यह देख रहे हैं कि विधायक संगठन के कामों में कितना सक्रिय रहे। जैसे 17 सितंबर को पीएम मोदी के जन्मदिन से लेकर 7 अक्टूबर तक सेवा ही संगठन के कार्यक्रम दिए गए। उन्होंने कहा कि कई कार्यक्रम बूथ स्तर पर होते हैं। कई कार्यक्रम मंडल लेवल पर होते हैं। कई जिला स्तर पर होते हैं। पार्टी देख रही है कि उनमें विधायकों की कितनी सक्रियता रही। यह देख रहे हैं कि विधायक संगठन को कितना सहयोग करते हैं। फीडबैक लेने का काम चल रहा है। कुछ जगहों से रिपोर्ट आ भी गई है, कहीं काम चल रहा है। जब राष्ट्रीय स्तर पर हमसे विधायकों का फीडबैक मांगा जाएगा तो हम इसी आधार पर विधायक के बारे में बताएंगे।
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