नई दिल्लीपूर्व भारतीय बल्लेबाज के उत्तराखंड क्रिकेट टीम के कोच पद से इस्तीफा देने के बाद इस खेल में धर्म और आस्था के आने से विवाद हो गया है। अब टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने इस पर अपनी राय रखी है। कैफ ने 'इंडियन एक्सप्रेस' में अपने एक कॉलम में पुरानी बातों को भी साझा किया है। कैफ ने साथ ही बताया कि किस तरह दिग्गज सचिन तेंडुलकर अपने किट बैग में साई बाबा की तस्वीर रखते थे और जहीर खान भी अपनी आस्था के अनुरूप चीजें रखते थे लेकिन कभी किसी ने कोई विवाद नहीं किया। उन्होंने सवाल किया कि इस महान खेल में धर्म कब से आ गया। पढ़ें, उन्होंने साथ ही कहा कि वसीम जाफर के साथ उनकी धार्मिक पहचान को लेकर जो भी कुछ हो रहा है, वह बेहद खराब है। कैफ ने लिखा, 'खेल में धर्म कब से आ गया? मैं यूपी के लिए अलग-अलग टीमों से खेला, भारत के लिए अलग-अलग जोन की टीमों का प्रतिनिधित्व किया, इंग्लैंड के क्लब और काउंटी से खेला लेकिन कभी मुझे अपने धर्म को लेकर कुछ कहा नहीं किया गया।' उन्होंने आगे लिखा, 'मैंने रनों की कमी के बारे में चिंता की, अपनी टीम के साथियों को बुरे दौर और फॉर्म से उबरने के लिए प्रेरित किया और सोचा कि मुकाबला कैसे जीतें। कभी भी मैं यह सोचकर सोने नहीं गया कि एक टीम साथी मेरे धर्म के बारे में क्या सोचता है।' कैफ ने लिखा, 'मुझे याद है कि सचिन अपने क्रिकेट किट बैग में अपने आराध्य साईं बाबा की तस्वीर रखते थे। वीवीएस लक्षमण अपने भगवान की रखते थे। जहीर खान, हरभजन सिंह अपनी-अपनी आस्था के अनुरूप चीजें करते थे। सौरव गांगुली हो या जॉन राईट,हम सभी अलग-अलग परिवेश,भाषा,धर्म के थे लेकिन हम आपस में कभी इन चीजों के बीच ना मनभेद ना मतभेद करते थे। हम हिंदू-मुस्लिम सिख या इसाई नहीं थे। हम सभी एक साथ,एक देश के लिए एकजुट होकर खेलते थे।' उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए लिखा, 'हॉस्टल के दिनों में छोटे-छोटे कमरों में हम 5 लोग रहते थे। भुवन चंद्र हरबोला का कमरा मेरे सामने ही था। हर सुबह उनके कमरे में जलने वाली अगरबत्ती की खुशबू मेरे कमरे में महकती तो मैं भी अपने कमरे में नमाज पढ़ता। रोज हनुमान चालीसा पढ़ने की आवाजें सुनता। मैं प्रफेशनल क्रिकेटर बना और वह एक पुलिसकर्मी लेकिन अपनी दोस्ती बरकरार रही।' हरबोला 1996 में कैफ के साथ अंडर-15 वर्ल्ड में भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे जिसमें देश ने खिताबी जीत दर्ज की। 40 वर्षीय कैफ ने लिखा, 'मैं इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से आता हूं, मेरा घर पंडितों की एक कॉलोनी के काफी करीब था, जहां मुझे इस महान खेल से प्यार हुआ। हम एक-साथ खेले। यह सुंदर खेल समावेशी है जहां हर जाति, हर आर्थिक पृष्ठभूमि और विश्वासों के लोग एक साथ आते हैं।'
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