कमेडियन कुणाल के हलफनामे पर याचिकाकर्ता को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया गया

नई दिल्ली स्टैंडप कमेडियन कुणाल कामरा () के खिलाफ अदालत की अवमानना मामले की सुनवाई चार हफ्ते के लिए टाल दी गई है। कुणाल कामरा ने इस मामले में जो जवाब दाखिल किए हैं उस पर एक याचिकाकर्ता ने काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा जिसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वह चार हफ्ते में जवाब दाखिल करे और सुनवाई चार हफ्ते के बाद के लिए टाल दी है। दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी18 दिसंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन कुणाल कामरा और कार्टूनिस्ट रक्षिता तनेजा के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान कंटेप्ट नोटिस जारी किया था। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने इन दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा था। दोनों के खिलाफ अलग-अलग अवमानना याचिकाएं दायर की गई थी और दोनों को अलग-अलग नोटिस जारी किया गया था। कुणाल कामरा के खिलाफ होगी कार्रवाईसुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में कुणाल कामरा के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अपनी सहमति दे दी थी। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने 12 नवंबर को कहा था कि कुणाल कामरा ने जो टि्वट की है वह बेहद आपत्तिजनक है और ऐसे में कुणाल कामरा के खिलाफ अदालत के अवमानना की कार्यवाही शुरू हो सकती है। कुणाल कामरा का जवाबअपने जवाब में कुणाल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश कर कहा था कि उन्होंने जो टि्वट किया था वह सुप्रीम कोर्ट के प्रति आम जनता के भरोसा को कम करने की मंशा से नहीं किया था। सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामा में कामरा ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि उसने सीमा लांघी है तो उसके इंटरनेट अनंत काल तक के लिए बंद कर सकती है। ऐसा होगा तो वह कश्मीरी दोस्तों की तरह हर साल 15 अगस्त पर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं का पोस्ट कार्ड लिखा करेंगे। मेरी इतनी क्षमता नहीं है- कुणाल कामराकुणाल कामरा ने अपने जवाब में ये भी कहा था कि उनके किसी भी आलोचना वाले टि्वट से सुप्रीम कोर्ट की नीव हिल जाएगी ऐसा कहना उनकी योग्यता को ज्यादा करके आंकने जैसा होगा। कामरा ने कहा कि जूडिशियरी के प्रति लोगों का जो सम्मान है वह उसके खुद के काम के वजह से है। लोगों की आलोचना से पब्लिक का भरोसा खत्म नहीं होता है। मेरी ऐसी क्षमता नहीं है कि दुनिया की सबसे मजबूत संस्थान सुप्रीम कोर्ट की बुनियाद मेरे आलोचना से हिल जाए। हास्य कलाकार अपने अलग अंदाज से लोकहित के मामले से जुड़े सवाल उठाता है। यदि शक्तिशाली व्यक्ति और संस्थान आलोचना सहने की अपनी योग्यता नहीं दिखाएंगे तो फिर ऐसे देश में हम होंगे जहां कालाकार को रोका जाएगा और दूसरों की कठपुतली बने लोगों को तरजीह मिलेगी।


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