लाइन ऑफ कंट्रोल पर बसे कुसलिया गांव में कुछ लोग हमसे मिलने इक्ट्ठा हुए हैं। गांव के कुछ बुजुर्ग बता रहे हैं कि जीरो लाइन में रहने का क्या दर्द है। सामने बर्फ से ढके बेहद खूबसूरत पहाड़ हैं, ठंडी हवा और खूबसूरत नजारों को जहां खुशी का अहसास कराना चाहिए था वहीं पाकिस्तान की नापाक हरकतों की वजह से यहां की खूबसूरती में खौफ का जहर घुल रहा है। यहां सामने पहाड़ों के ऊपर बनी पाकिस्तान सेना की पोस्ट इंडियन आर्मी की पोस्ट को ही निशाना बनाने की कोशिश नहीं करती, बल्कि वह मासूम, निहत्थे सिविलियंस पर भी बर्बरता कर रही है। पुंछ सेक्टर में एलओसी से NBT रिपोर्टर पूनम पांण्डेय की ग्राउंड रिपोर्ट।Ground Report from LoC: जम्मू और कश्मीर की खूबसूरत वादियों में पाकिस्तान किस तरह जहर घोल रहा है, यह लाइन ऑफ कंट्रोल के पास बसे गांवों में जाने पर पता चलता है।

लाइन ऑफ कंट्रोल पर बसे कुसलिया गांव में कुछ लोग हमसे मिलने इक्ट्ठा हुए हैं। गांव के कुछ बुजुर्ग बता रहे हैं कि जीरो लाइन में रहने का क्या दर्द है। सामने बर्फ से ढके बेहद खूबसूरत पहाड़ हैं, ठंडी हवा और खूबसूरत नजारों को जहां खुशी का अहसास कराना चाहिए था वहीं पाकिस्तान की नापाक हरकतों की वजह से यहां की खूबसूरती में खौफ का जहर घुल रहा है। यहां सामने पहाड़ों के ऊपर बनी पाकिस्तान सेना की पोस्ट इंडियन आर्मी की पोस्ट को ही निशाना बनाने की कोशिश नहीं करती, बल्कि वह मासूम, निहत्थे सिविलियंस पर भी बर्बरता कर रही है। पुंछ सेक्टर में
एलओसी से NBT रिपोर्टर पूनम पांण्डेय की ग्राउंड रिपोर्ट
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बच्ची के आंसुओं में छिपा है कश्मीरियों का दर्द

जब एक बुजुर्ग से मैं बात कर ही रही थी तो कुछ दूरी पर एक बच्ची दिखाई दी। करीब 5-6 साल की रही होगी। मैं उसे देखकर पहले मुस्कुराई तो उसने अपना सर नीचे झुका लिया। फिर सर उठाया तो मैंने हाथ से इशारा कर अपने पास बुलाया, लेकिन मेरे ऐसा करते ही बच्ची जोर जोर से रोने लगी और रोते हुए अपने घर की तरफ तेजी से भागी। मैं भी एकदम हैरान कि बच्ची क्यों रोई। बुजुर्ग ने बताया कि पाकिस्तान की हरकतों की वजह से खौफ का माहौल रहता है, खासकर किसी अजनबी को देखकर बच्चे एकदम डर जाते हैं। फिर उन्होंने नसीम अख्तर से मिलवाया। नसीम अपने पांच साल के बेटे को खुद से चिपकाए हुए खड़ी थीं। उनके पति इंडियन आर्मी के साथ पोर्टर का काम करते थे। इसी साल जनवरी में पाकिस्तान की बर्बर बैट एक्शन टीम उनके नित्हथे पति का सिर काटकर ले गई। साथ में दो और पोर्टर को मौत के घाट उतार दिया। नसीम पूछती हैं हमने किसी का क्या बिगाड़ा था? यह पूछते हुए आंखें डबडबा आई, तेजी से अपने आंसू पोछते हुए नसीम ने अपने बेटे के सर पर हाथ फेरा। बताया कि उनके बेटे और 9 साल की बेटी को यह पता नहीं है कि उनके अब्बू अब कभी वापस नहीं आएंगे। बच्चों को बताया है कि अब्बू कहीं बाहर गए हैं और कुछ दिनों बाद वापस आ जाएंगे। जब कभी आसपास से कुछ सुनकर आते हैं और पूछते है कि क्या अब्बू का सिर काट दिया तो उन्हें जवाब देना मुश्किल होता है। नसीम बताती हैं कि मैंने बच्चों से कहा है कि वह सब झूठ है।
पिछले 6 महीनों में 6 नागरिकों की मौत

नसीम के पति के साथ ही पाकिस्तानी बैट एक्शन टीम ने शफीना के पति को भी मार डाला। वह भी पोर्टर का काम करते थे। शफीना की शादी को 6 साल हुए हैं और उनके दो छोटे छोटे बच्चे हैं। एक छोटा देवर भी है। शफीना पूछती हैं कि वह अपने बच्चे अब कैसे पालेगी। शफीना के सवालों का किसी के पास कोई जवाब नहीं है। पाकिस्तानी सेना सिविलियंस को लगातार निशाना बना रही है और लाइन ऑफ कंट्रोल के पास रहने वाले लोगों ने गोलीबारी में किसी न किसी अपने को खोया है। 6 महीने के भीतर ही इस इलाके में पाकिस्तानी गोलाबारी से 6 सिविलियंस की मौत हुई है और कई जख्मी हुए हैं।
अगली पीढ़ी भी यही दंश झेलने को मजबूर

52 साल के रियाज अहमद कहते हैं सबसे ज्यादा दुख इस बात का होता है कि हमने जो झेला वहीं हमारी अगली पीढ़ी भी झेल रही हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच दुश्मनी बढ़ रही है और हमारे बच्चे गोलाबारी के बीच खौफ और अनिश्चितता के साए में बड़े हो रहे हैं। कौन कब तक सलामत है इसका कोई भरोसा नहीं। हम चाहते हैं कि या तो यह दुश्मनी खत्म हो या फिर इस दुश्मनी की जड़ खत्म हो। हम अमन चाहते हैं। हर वक्त इस डर में रहना कि पता नहीं कब गोला आ जाए और कब किस घर में मातम छा जाए… वह कहते हैं - यह जिंदगी नहीं है।
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