अभया केस: 28 साल पुराने केस में अपराधी ने ही दिया बयान, यूं कातिल तक पहुंची CBI

तिरुवनंतपुरम वह 29 अगस्त 2019 का दिन था, सिस्टम अभया केस में ट्रायल का तीसरा और अहम दिन था। सीबीआई की तरफ से अडक्का राजू को गवाह के रूप में पेश किया गया था। राजू एक वॉटेंड अपराधी था जिसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज थे। पहले दिन, सिस्टर अभया की हॉस्टल मेट सिस्टर अनुपमा और अगले दिन उनके पड़ोसी संजू पी मैथ्यु बयान से मुकर गए थे जिसके चलते सीबीआई वकील यह आरोप लगाने को मजबूर होना पड़ा कि सभी गवाह प्रभावित थे। इसके बाद तीसरे दिन राजू ने गवाही देते हुए कोर्ट को बताया कि उसने 27 मार्च 1992 की देर रात फादर थॉमस कुट्टूर समेत दो लोगों को सेंट पायस कॉन्वेंट परिसर में देखा था। गौरतलब है कि इसी दिन सिस्टर अभया का शव कॉन्वेंट के कुएं से बरामद हुआ था। अब पढ़िए इस केस के सबसे अहम गवाह राजू का बयान- 'देर रात फादर कोट्टूर को देखा था' राजू ने सीबीआई स्पेशल कोर्ट में बताया, 'मैं उस वक्त कॉन्वेंट बिल्डिंग की छत पर लगे एक लाइटिंग कंडक्टर से कॉपर कॉम्पोनेंट चुरा रहा था।' राजू ने आगे बताया, 'मैंने उससे पहले दो बार कॉम्पोनेंट चुराने का प्रयास किया था लेकिन असफल रहा। मैंने दो लोगों पर सीढ़ियों पर देखा जो टॉर्च की रोशनी से आस-पास तलाशी ले रहे थे। उनमें से एक लंबा आदमी था और दूसरा फादर कोट्टूर थे। उन दोनों को देखकर मैंने चोरी का प्लान छोड़ दिया वहां से चुपचाप चला आया।' क्राइम ब्रांच पर लगाए गंभीर आरोप राजू का बयान को एर्नाकुलम में न्यायिक प्रथम श्रेणी के मैजिस्ट्रेट के सामने शपथ पत्र के रूप में दर्ज किया गया। उसने फादर कोट्टुर को भी पहचान लिया जो उस वक्त कोर्ट में मौजूद थे। सुनवाई के दौरान राजू ने क्राइम ब्रांच टीम के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए जिसने मामले की शुरुआती जांच की थी। उसने कहा कि क्राइम ब्रांच के जासूसों ने उसे पकड़कर 57 से 58 दिन तक कस्टडी में रखा। बचाव पक्ष के वकील ने भी 10 आपराधिक मामलों की लिस्ट जारी की जिसमें राजू आरोपी था। बचाव पक्ष की सारी कोशिश बेकार गई राजू ने अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि से इनकार नहीं किया। हालांकि बचाव पक्ष के वकील के गवाह के दोषपूर्ण चरित्र को साबित करने की कोशिश उलटी पड़ गई और अदालत ने राजू के बयान को वर्तमान मामले में महत्वपूर्ण करार देते हुए स्वीकृत किया। क्या है पूरा मामला? बता दें कि केरल में सबसे बड़ी पहेली बनी सिस्टर अभया की मौत मामले में फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी 28 साल बाद 22 दिसंबर 2020 दोषी करार दिए गए हैं। केरल के कोट्टयम के सेंट पायस कॉन्वेंट में रहने वाली सिस्टर अभया की मौत से हत्या तक की क्राइम स्टोरी बहुत सारे मोड़ों से गुजरी और आखिरकार कातिल तक पहुंच ही गई। कैसे हुई थी सिस्टर अभया की हत्या? दरअसल 1992 को सिस्टर अभया ने फादर थॉमस कोट्टुर और सिस्टर सोफी को किचन में आपत्तिजनक स्थिति में देखा था। इससे पहले की सिस्टर अभया भाग पातीं फादर कोट्टूर और सिस्टर सोफी ने उन्हें पकड़ लिया और उसका मुंह दबा दिया क्योंकि वह चीखने की कोशिश कर रही थीं। सिस्टर सोफी किचन से एक कुल्हाड़ी ले आई और उससे अभया से सिर पर हमला किया। हमले के बाद अभया जमीन पर गिर गईं और बेजान हो गईं। पुलिस ने बताया था खुदकुशी का मामला बेजान पड़े सिस्टर अभया के शव को फादर कोट्टूर और सिस्टर सोफी ने घसीटते हुए पास के कुएं में डाल दिया। अभया की एक चप्पल और पानी का बोतल किचन के दरवाजे पर पड़ा था जिसे बाद में आरोपियों ने नष्ट कर दिया था। पहले स्थानीय पुलिस और फिर अपराध शाखा ने मामले की जांच की और कहा कि यह खुदकुशी का मामला है। कई गवाह बयान से मुकर गए सीबीआई ने 2008 में मामले की जांच अपने हाथ में ली। इस मामले में सुनवाई पिछले साल 26 अगस्त को शुरू हुई और कई गवाह मुकर गए। 1992 में हुई इस हत्या की जांच करने वाले सीबीआई के डीएसपी वर्गीज पी थामस ने सबसे पहले इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि यह हत्या है।


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