वीआईपी पार्टी ने महागठबंधन से नाता तोड़ लिया है। लेकिन जो तरीका अपनाया, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी। पहले महागठबंधन के साथियों के साथ हाथ उठा कर तस्वीर खींचवाई। फिर तेजस्वी ने सीटों का ऐलान किया, तो बवाल काट दिया। उसके बाद मुकेश सहनी सुर्खियों में आ गए हैं। मुकेश सहनी 2019 लोकसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में शामिल हुए थे। उनके हिस्से में लोकसभा की 3 सीटें आई थीं। उस वक्त सवाल उठे थे कि 6 माह पुरानी पार्टी को 'औकात' से ज्यादा महागठबंधन में तवज्जो क्यों मिली। इसके पीछे की कहानी भी बहुत दिलचस्प है। क्योंकि सहनी पैसों के बूते बिहार की राजनीति में अपना भौकाल बनाया था। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि वह 2015 के विधानसभा चुनावों में तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ मंच साझा करते थे।
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