अगले साल मार्च में कोरोना वैक्सीन? सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी

नई दिल्ली कोरोना महामारी (Corona Pandemic) की वैक्सीन () के लिए पूरी दुनिया के वैज्ञानिक युद्ध स्तर पर रिसर्च कर रहे हैं। कुछ वैक्सीन ट्रायल के तीसरे फेज में भी पहुंच चुके हैं। वहीं, भारत में भी तीन में से कम से कम दो वैक्सीन के अगले साल मार्च तक लॉन्चिंग की उम्मीद है। सरकार ने वैक्सीन वितरण से लेकर उसके प्रबंधन के लिए तैयारी भी शुरू कर दी है। दरअसल, सरकार को भी अगले साल के शुरू तक कोविड-19 की वैक्सीन मिलने की उम्मीद है। जानें सरकार को क्यों है इतनी उम्मीद गुरुवार को सरकार और वैक्सीन बनाने वाली शीर्ष कंपनियों के साथ बैठक में संकेत मिले कि कोरोना वैक्सीन का पहला बैच मार्च तक लॉन्च हो सकता है। हालांकि, ये सब दोनों वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के सफल होने और विशेषज्ञों के क्लीयरेंस पर ही निर्भर करेगा। वैक्सीन को लेकर शुरू हो गई है बड़ी तैयारी सरकारी सूत्रों ने ईटी को बताया, 'बैठक में वैक्सीन की टाइमलाइन, रेग्युलेटरी संस्थानों से मंजूरी की प्रक्रिया, वैक्सीन की उपलब्धता, वितरण और अन्य चुनौतियों पर चर्चा की गई।' बैठक में वैक्सीन कंपनियों सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII), भारत बायोटेक और जाइडस कैडिला के वरिष्ठ अधिकारियों ने नीति आयोग के सदस्य विनोद पॉल की अध्यक्षता में बैठक में शामिल हुए। मार्च में मिल जाएगी वैक्सीन? सूत्रों ने बताया कि बैठक में महत्वपूर्ण मंत्रालयों के सचिव, हेल्थ विभाग, ICMR और फार्मास्युटिकल्स ने भी 1 अक्टूबर को हुई इस बैठक में हिस्सा लिया था। उन्होंने बताया कि अगर सबकुछ सही रहा तो मार्च वह महीना हो सकता है कि जब वैक्सीन को लॉन्च किया जा सकता है। वैक्सीन की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को कहा था कि सरकार का लक्ष्य 20-25 करोड़ लोगों को जुलाई 2021 तक वैक्सीन देने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा उस वक्त तक सरकार को 400-500 मिलियन वैक्सीन के डोज मिल सकते हैं। एक अन्य सूत्र ने बताया कि वैक्सीन निर्माताओं से भी वैक्सीन की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है इसके अलावा वैक्सीन की संख्या और सरकार से किसी प्रकार की मदद की जरूरत को लेकर भी पूछा गया है। हालांकि सरकार ने वैक्सीन निर्माताओं को अभी यह आश्वासन नहीं दिया है कि वह उनसे वैक्सीन के कितने डोज खरीदेगी। अक्टूबर अंत तक राज्यों को देनी है जानकारी उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस वक्त हमलोग सबकुछ अपने रिस्क पर कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था, 'एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ पैनल वैक्सीन की हर प्रकार की खोज खबर ले रहा है। राज्यों को अक्टूबर के अंत तक वैक्सीन दिए जाने वाले लोगों की जानकारी भेजने को कहा गया है। इन्हें पहले वैक्सीन देने की योजना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता फ्रंटलाइन हेल्थवर्करों को वैक्सीन देने की है। स्वास्थ्य मंत्रालय इस वक्त ऐसे फॉर्मेट पर काम कर रही है जिसमें राज्य सरकारों की सौंपी गई लिस्ट के अनुसार, खासकर हेल्थ वर्करों को यह वैक्सीन सबसे पहले दी जाएगी। सरकार ने विश्व बैंक से लिया कर्जा सरकार ने कोविड से निपटने के लिए विश्व बैंक, एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक और एशियन डिवेलपमेंट बैंक से 15 हजार करोड़ रुपये कर्ज भी लिया है। इसके अलावा राज्यों और अन्य एजेंसियों की मदद बजट के संसाधनों से की जा रही है। 'सरकार सभी को उपलब्ध करवाएगी वैक्सीन' केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लोन रीइम्बर्समेंट के आधार पर है और सरकार इन फंड्स पर निर्भर नहीं है। देश के सभी लोगों को वैक्सीन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इस लक्ष्य को पूरा करने में कोई भी बाधा नहीं आएगी।


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