इस प्रदूषण से ब्रेन पर भी असर! दिल्ली-एनसीआर में बढ़ी ऐसे मरीजों की टेंशन

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है खासकर उन लोगों की जो किसी बीमारी से पहले से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों ने भी ऐसे मरीजों के लेकर चिंता जताई है साथ ही यह भी कहा है कि बच्चों पर इसका अधिक असर पड़ सकता है। एम्स डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने भी प्रदूषण को लेकर लोगों को आगाह किया है। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के डॉ. धीरेन गुप्ता ने शनिवार कहा कि पीएम वैल्यू इतनी खराब है कि यह आंखों को प्रभावित कर रही है, जलन पैदा कर रही है। इसका ब्रेन पर भी असर पड़ रहा है ,प्रदूषण के कारण बच्चे और चिड़चिड़े हो जाते हैं। प्रदूषण के कारण जिन बच्चों को रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन हो रहा है, उन्हें सांस की समस्या ज्यादा हो रही है। बाल रोग विभाग के डॉ धीरेन गुप्ता ने बताया कि पिछले 10-15 दिनों में हमने अस्थमा और एलर्जी वाले लोगों की परेशानी बढ़ते देखा है। उन्हें अधिक इनहेलेशन थेरेपी की आवश्यकता होती है। सांस वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है, कुछ गंभीर मरीज हॉस्पिटल में भर्ती भी हैं। प्रदूषण से कोरोना के भी आंकड़े बढ़ सकते हैं। अरुणेश कुमार ( पल्मोनोलॉजी विभाग, पारस अस्पताल, गुरुग्राम) ने कहा कि जिन मरीजों को सांस लेने में दिक्कत की शिकायत है, उनकी हम निगरानी कर रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों का खासकर ध्यान रखने की जरूरत है। प्रदूषण से ऐसे लोगों की समस्याएं बढ़ गई हैं। एम्स चीफ डॉ. रणदीप गुलेरिया ने पहले ही चेताया है कि कुछ डाटा के अनुसार कोरोना वायरस प्रदूषण में अधिक देर तक रहता है। जिन इलाकों में प्रदूषण अधिक होता है वहां कोरोना की स्थिति गंभीर हो सकती है। एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया ने साथ ही कहा कि दिल्ली वायु प्रदूषण का सांस संबंधी विशेष रूप से फेफड़ों की बीमारियां, अस्थमा से पीड़ित लोगों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।


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