कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट करीब 260 करोड़ रुपये की लागत से 589 एकड़ भूभाग में बना है। यह उत्तर प्रदेश का तीसरा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा है और बौद्ध धर्मस्थल को दुनिया भर से जोड़ने के मकसद से इसका निर्माण किया गया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का उद्घाटन किया। काफी लंबे वक्त से कुशीनगर में एयरपोर्ट की मांग हो रही थी। उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने विमानन क्षेत्र में नयी ऊर्जा भरने के लिए कई कदम उठाए हैं। कुशीनगर गौतमबुद्ध का महापरिनिर्वाण स्थल है और बौद्ध समुदाय के लोगों का एक अहम तीर्थ स्थल है।

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट करीब 260 करोड़ रुपये की लागत से 589 एकड़ भूभाग में बना है। यह उत्तर प्रदेश का तीसरा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा है और बौद्ध धर्मस्थल को दुनिया भर से जोड़ने के मकसद से इसका निर्माण किया गया है।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में स्थित महापरिनिर्वाण मंदिर

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में स्थित महापरिनिर्वाण मंदिर, पूरी दुनिया में बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर में भगवान बुद्ध की 6.1 मीटर ऊंची मूर्ति लेटी हुई मुद्रा में रखी है। यह मूर्ति उस काल को दर्शाती है जब 80 वर्ष की आयु में भगवान बुद्ध ने अपने पार्थिव शरीर को छोड़ दिया था और सदा-सदा के लिए जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त हो गए थे, यानि उन्हे मोक्ष की प्राप्ति हो गई थी।
कुशीनगर में बीता भगवान बुद्ध का आखिरी समय

भगवान बुद्ध की इस मूर्ति को लाल बलुआ पत्थर के एक ही टुकडें से बनाया गया था। इस मूर्ति में भगवान को पश्चिम दिशा की तरफ देखते हुए दर्शाया गया है, यह मुद्रा, महापरिनिर्वाण के लिए सही आसन माना जाता है। इस मूर्ति को एक बड़े पत्थर वाले प्लेटफॉर्म के सपोर्ट से कोनों पर पत्थरों के खंभे पर स्थापित किया गया है। इस प्लेटफॉर्म या मंच पर, भगवान बुद्ध के एक शिष्य हरिबाला ने 5 वीं सदी में एक शिलालेख बनवाया था। मंदिर और विहार दोनों ही एक शिष्य की तरफ से गुरू को दिया जाने वाला उपहार था। इस मंदिर में हर साल, पूरी दुनिया से हजारों पर्यटक और तीर्थयात्री भारी संख्या में आते है।
पीएम मोदी ने भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना की

बौद्ध धर्म के अनुयायियों वाले देशों को कुशीनगर से जोड़ने की ये पहल की गई है। हवाईअड्डे के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और इससे क्षेत्र के आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में मदद मिलेगी, साथ ही रोजगार के नये अवसरों का भी सृजन होगा।
बौद्ध भिक्षुओं से की मुलाकात

पीएम मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध से संबद्ध स्थानों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है , और कुशीनगर का विकास उत्तर प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार के लिए उच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के ज्ञान से लेकर महापरिनिर्वाण तक संपूर्ण यात्रा का साक्षी यह क्षेत्र अब सीधे दुनिया से जुड़ गया है।
महात्मा बुद्ध कौन थे और उनका जन्म कहां हुआ था?

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व नेपाल के कपिलवस्तु में स्थिति लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। यह कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन और रानी महामाया के बेटे थे। इनकी शादी यशोधरा से हुई थी, लेकिन एक दिन ये अचानक घर छोड़कर निकल गए और बाद में गौतम बुद्ध कहलाए।
बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कब हुई?

ऐसा कहा जाता है कि वैशाख माह की पूर्णिमा को सिद्धार्थ एक पेड़ के नीचे ध्यान लगाकर बैठे थे तभी उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। उस पेड़ को उसके बाद से बोधिवृक्ष कहा जाने लगा। ज्ञान प्राप्ति के बाद भी वह कई हफ्तों तक उसी बोधिवृक्ष के नीचे साधना में लगे रहे। फिर बाद में धर्म का उपदेश करने के लिए वहां से निकल गए।
260 करोड़ रुपये की लागत से 589 एकड़ भूभाग में बना

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट करीब 260 करोड़ रुपये की लागत से 589 एकड़ भूभाग में बना है। यह उत्तर प्रदेश का तीसरा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा है और बौद्ध धर्मस्थल को दुनिया भर से जोड़ने के मकसद से इसका निर्माण किया गया है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों वाले देशों को कुशीनगर से जोड़ने की ये पहल की गई है। हवाईअड्डे के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और इससे क्षेत्र के आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में मदद मिलेगी, साथ ही रोजगार के नये अवसरों का भी सृजन होगा।
बुद्ध का निर्वाण कब हुआ था?

ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध ने देश-विदेश की अलग-अलग जगहों पर धर्म का प्रचार किया। उसके बाद उन्होंने भारत के राजगीर, वैशाली, लोरिया और सारनाथ में निवास किया। बताया जाता है कि गौतम बुद्ध ने सारनाथ में अपना अंतिम उपदेश दिया था और फिर निर्वाण को प्राप्त हुए थे।
बौद्ध धर्म में कितने संप्रदाय होते हैं?

भगवान बुद्ध के समय तो इस धर्म में किसी प्रकार का कोई पंथ या संप्रदाय नहीं था, लेकिन बुद्ध के निर्वाण के बाद द्वितीय बौद्ध संगति में भिक्षुओं में मतभेद हो गया जिसके बाद इनके दो भाग हो गए। पहले को हीनयान और दूसरे को महायान कहते हैं। महायान मतलब बड़ी गाड़ी या नौका और हीनयान मतलब छोटी गाड़ी या नौका। महायान के अंतर्गत बौद्ध धर्म की एक तीसरी शाखा थी वज्रयान। झेन, ताओ, शिंतो आदि अनेक बौद्ध संप्रदाय भी उक्त दो संप्रदाय के अंतर्गत ही माने जाते हैं।
बौद्ध धर्म को मानने वाले कौन से धर्म ग्रंथ को मानते हैं?

आपको बता दें कि गौतम बुद्ध ने अपना उपदेश पालि भाषा में दिया था। इनके उपदेश को त्रिपिटकों में संकलित किया गया है। त्रिपिटक के तीन भाग- विनयपिटक, सुत्तपिटक और अभिधम्मपिटक हैं। इनके अंतर्गत उपग्रंथों की लंबी श्रृंखलाएं हैं। सुत्तपिटक के पांच भागों में से एक खुद्दक निकाय की पंद्रह रचनाओं में से एक है धम्मपद।
बौद्ध धर्म के स्तूप कहां-कहां स्थित हैं?

स्तूप एक गुंबदाकार भवन होता था, जो बुद्ध से संबंधित सामग्री या स्मारक के रूप में स्थापित किया जाता था। बौद्ध धर्म के 8 मुख्य स्तूप हैं जो कुशीनगर, पावागढ़, वैशाली, कपिलवस्तु, रामग्राम, अल्लकल्प, राजगृह और बेटद्वीप में बने। पिप्पलीय वन में अंगार स्तूप बना।
बौद्ध धर्म किन देशों में प्रमुख है और किन देशों में इनका प्रभाव है?

जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, चीन, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, कंबोडिया, हॉन्ग कॉन्ग, मंगोलिया, तिब्बत, भूटान, मकाऊ, म्यांमार और श्रीलंका का प्रमुख धर्म बौद्ध ही है। इसके अलावा भारत, नेपाल, मलेशिया, इंडोनेशिया, रूस, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कनाडा, सिंगापुर, फिलीपींस और अफगानिस्तान जैसे देशों में भी बौद्ध धर्म को मानने वाले अच्छी तादाद में हैं। बौद्ध काल के दौरान अफगानिस्तान का बामियान इलाका बौद्ध धर्म की राजधानी थी।
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