नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई से मना कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता ने शादी के लिए गलत तरीके से धर्म परिवर्तन के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए कानून को चुनौती थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस मामले में हाई कोर्ट अप्रोच करें। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अर्जी वापस लेने की इजाजत दे दी। हाईकोर्ट का मत देखना चाहता सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच के सामने याचिकाकर्ता की ओर से मध्य प्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर्डिनेंस को चुनौती दी गई थी। ये कानून शादी के लिए धर्म परिवर्तन को रोकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में वह हाई कोर्ट का मत देखना चाहते हैं लिहाजा याचिकाकर्ता मामले में हाई कोर्ट अप्रोच कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस मामले में दाखिल याचिका वापस लेने की अनुमित दे दी और इस बात की लिबर्टी दी है कि वह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सकते हैं। 30 जनवरी को मध्यप्रदेश सरकार को जारी किया था नोटिस गौरतलब है कि एक अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 30 जनवरी को राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चुकी है। इस मामले से संबंधित अन्य याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि पहले हाई कोर्ट का फैसला आ जाए और वह हाई कोर्ट का इस मामले पर मत देखना चाहते हैं। शादी के इरादे से गलत तरीके से धर्म परिवर्तन के खिलाफ बनाए गए कानून को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत उलेमा ए हिंद को मामले में पक्षकार बनने की इजाजत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने किया था वैधता परीक्षण का फैसला शादी के लिए गलत तरीके से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने और रेग्युलेट करने वाले नए कानून के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के वैधता को परखने का फैसला किया था। यूपी सरकार ने प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन ऑफ रिलिजियस ऑर्डिनेंस 2020 और उत्तराखंड सरकार ने फ्रीडम ऑफ रिलिजियस एक्ट 2020 अध्यादेश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6 जनवरी को इन कानूनों को एग्जामिन करने का फैसला किया था। यूपी, उत्तराखंड से मांगा था जवाब कोर्ट ने यूपी और उत्तराखंड के कानून के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यूपी और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने दो अलग-अलग याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा था। वह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है।
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