नई दिल्ली रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में पैंगोंग झील और गलवान घाटी का दौरा करने का फैसला किया है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। भाजपा के वरिष्ठ नेता जुएल ओराम की अध्यक्षता वाली समिति मई या जून के अंतिम हफ्ते में वहां के दौरे पर जाना चाहती है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस समिति के सदस्य हैं। सूत्रों ने बताया कि इन इलाकों का दौरा करने का फैसला समिति की पिछली बैठक में लिया गया था। रक्षा मामलों की संसदीय समिति में जुएल ओराम सहित लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल हैं। इनमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, शरद पवार, संजय राउत, प्रेम चंद गुप्ता भी शामिल हैं। उस बैठक में गांधी शामिल नहीं हुए थे। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जाने के लिए समिति को सरकार से मंजूरी लेनी होगी। दूसरी तरफ पूर्वी लद्दाख में पैंगोग सो (झील) इलाके में सैनिकों को पीछे हटाने के लिए चीन के साथ समझौते के बाद बीजिंग और भारत की सेनाएं इस इलाके में सैनिकों की संख्या को लगातार कम कर रही हैं और बख्तरबंद वाहनों को पीछे ले जा रही हैं। सेना के सूत्रों ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने बताया कि पैंगोंग सो के दक्षिण तट पर टकराव के बिंदु से युद्धक टैंक और बख्तरबंद वाहनों को हटाया जा रहा है जबकि उत्तरी तट के क्षेत्रों से जवानों को वापस बुलाया जा रहा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि बख्तरबंद वाहनों की वापसी का काम लगभग पूरा हो गया है और दोनों पक्षों द्वारा बनाए गए अस्थायी ढांचों को अगले कुछ दिन में गिराया जाएगा। इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, ‘‘पीछे हटने की प्रक्रिया में वक्त लगेगा क्योंकि दोनों ही पक्ष सैनिकों और सैन्य वाहनों को वापस बुलाने की सत्यापन प्रक्रिया एक साथ कर रहे हैं।’’ सूत्रों ने बताया कि जवानों और बख्तरबंद वाहनों की वापसी केवल टकराव के बिंदु वाले स्थानों से ही हो रही है जहां दोनों ओर के जवान बिलकुल आमने-सामने थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को बताया था कि चीन के साथ पैंगोंग झील के उत्तरी एवं दक्षिणी किनारों पर सेनाओं के पीछे हटने का समझौता हो गया है और भारत ने इस बातचीत में कुछ भी खोया नहीं है। सिंह ने बताया कि पैंगोंग झील क्षेत्र में चीन के साथ सेनाओं के पीछे हटने का जो समझौता हुआ है, उसके अनुसार दोनों पक्ष अग्रिम तैनाती चरणबद्ध तरीके से हटाएंगे । सीमा पर नौ महीने तक गतिरोध जारी रहने के बाद यह सफलता मिली है।
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