पोस्टल बैलट से वोट के अधिकार मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, चुनाव आयोग से मांग जवाब

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब दाखिल करने को कहा है जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा है कि जो लोग भी अपने संसदीय व विधानसभा क्षेत्र से बाहर रहते हैं उन्हें पोस्टल बैलेट के जरिए वोटिंग का अधिकार होना चाहिए। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच के सामने जब मामले की सुनवाई शुरू हुई तो याचिकाकर्ता से सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि ये किस तरह की अर्जी है। आप अगर इंग्लैंड में बैठे हैं और आप वोट यहां देंगे? अगर आप अपने विधानसभा इलाके में जाने को महत्व नहीं देते तो कानून आपकी मदद कैसे कर सकता है। इस पर याची ने कहा कि जो लोग चुनाव के वक्त अपने इलाके में नहीं हैं ऐसे स्टूडेंट्स, एनआरआई और अन्य लोगों को वोटिंग का अधिकार मिलना चाहिए। इसके लिए पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल होना चाहिए या फिर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल होना चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील के. राज ने दलील दी कि कुछ ही लोगों के लिए पोस्टल बैलेट पेपर की व्यवस्था रखी गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि स्टूडेंट्स के लिए वोटिंग राइट्स होने चाहिए। एनआरआई के लिए भी यह अधिकार होना चाहिए कि वो पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल कर सकें। साथ ही वो लोग जो अपने इलाके में नहीं हैं वो पोस्टल बैलेट के लिए वोटिंग कर सकें, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। याची ने कहा कि तमाम वर्ग के वोटर ऐसे हैं जो घर से दूर काम के सिलसिले में होते हैं। जैसे प्रवासी मजदूर हैं जो वोटिंग के समय अपने घर से दूर होते हैं साथ ही बिजनेस प्रोफेनल्स या फिर स्टूडेंट्स घर से दूर रहते है। इन तमाम वर्गों को वोटिंग के अधिकार से वंचित होना पड़ता है।


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