दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को क्लाइमेट ऐक्टिविस्ट दिशा रवि को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि किसान आंदोलन की टूलकिट में हिंसा का आह्मन नहीं किया गया था। कोर्ट ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिक सरकार की अंतरात्मा के रखवाले होते हैं और उन्हें केवल इस वजह से जेल में नहीं डाला जा सकता कि वे सरकारी नीतियों से असहमति जताते हैं। अदालत ने पाया कि दिशा रवि का उस टूलकिट या पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) से लिंक आपत्तिजनक नहीं है। जज धर्मेंद्र राणा ने कहा कि 'वॉट्सऐप ग्रुप बनाना या एक अहितकारी टूलकिट का एडिटर होना अपराध नहीं है।' 18 पन्नों के आदेश में जज धर्मेंद्र राणा ने क्या-क्या कहा है, आइए आपको बताते हैं।Disha Ravi Bail News: टूलकिट मामले में दिशा रवि को जमानत देते हुए ऐडिशनल डिस्ट्रिक्ट ऐंड सेशंस जज धर्मेंद्र राणा (ASJ Dharmender Rana) ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने क्या-क्या कहा, पढ़िए।

दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को क्लाइमेट ऐक्टिविस्ट दिशा रवि को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि किसान आंदोलन की टूलकिट में हिंसा का आह्मन नहीं किया गया था। कोर्ट ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिक सरकार की अंतरात्मा के रखवाले होते हैं और उन्हें केवल इस वजह से जेल में नहीं डाला जा सकता कि वे सरकारी नीतियों से असहमति जताते हैं। अदालत ने पाया कि दिशा रवि का उस टूलकिट या पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) से लिंक आपत्तिजनक नहीं है। जज धर्मेंद्र राणा ने कहा कि 'वॉट्सऐप ग्रुप बनाना या एक अहितकारी टूलकिट का एडिटर होना अपराध नहीं है।' 18 पन्नों के आदेश में जज धर्मेंद्र राणा ने क्या-क्या कहा है, आइए आपको बताते हैं।
'26 जनवरी की हिंसा से दिशा रवि के जुड़ाव के सबूत नहीं'

अपने आदेश में जज धर्मेंद्र राणा ने कहा, "मेरे सामने इस बात का लेशमात्र सबूत भी नहीं पेश किया गया है कि 26 जनवरी 2021 को हुई हिंसा करने वालों का PJF या आवेदक/आरोपी से कोई जुड़ाव हो।" कोर्ट ने कहा कि 'ऑन रिकॉर्ड ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह लगता हो कि रवि किसी पृथकतावादी विचार को मानने वाली हैं। अभियोजन पक्ष यह नहीं बता सका कि दिशा रवि ने कैसे पृथकतावादी तत्वों को ग्लोबल ऑडियंस दी।'
'हमारी 5,000 साल पुरानी सभ्यता कभी...'

दिशा रवि को जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा कि 'हमारी ये 5,000 साल पुरानी सभ्यता कभी भी भिन्न विचारों के खिलाफ नहीं रही।' अदालत के अनुसार, 'असहमति का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 में मजबूती से प्रतिष्ठापित है... बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में वैश्विक श्रोता खोजने का अधिकार निहित है।'
'विवाद से बचने के लिए पहचान छिपा रही थी दिशा'

अदालत ने कहा, "वॉट्सऐप ग्रुप बनाना या किसी अहानिकारक टूलकिट का एडिटर होना अपराध नहीं है। इसके अलावा उस टूलकिट या PJF के साथ लिंक आपत्तिजनक नहीं पाया गया है, ऐसे में उन्हें टूलकिट और PJF से लिंक करने वाला सबूत मिटाने के लिए वॉट्सऐप चैट डिलीट करना बेमायने हो जाता है।" कोर्ट ने कहा, "उसकी (दिशा) पहचान छिपाने की कोशिश और कुछ नहीं, केवल बेवजह के विवादों से बचने की कवायद मालूम होती है।"
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