नई दिल्ली भारत विदेशी राजनयिकों के जम्मू-कश्मीर दौरे के जरिये पाकिस्तान के आतंकी भूमिका की पोल खोलना चाहता है। 24 देशों के राजनयिकों ने जम्मू-कश्मीर का दौरा कर यहां हो रहे विकास कार्यों व जमीनी हकीकत का जायजा लिया। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि विदेशी राजनयिकों ने श्रीनगर स्थित चिनार कॉर्प्स हेडक्वार्टर का दौरा किया। यहां उन्हें जम्मू-कश्मीर की मौजूदा सुरक्षा स्थितियों के साथ ही बाहरी खतरों की भी जानकारी दी गई। भारत की तरफ से पाकिस्तान द्वारा कथित मानवाधिकार हनन को लेकर चलाए जा रहे दुष्प्रचार अभियान की भी हवा निकाली गई। यहां बताया गया कि पाकिस्तान कैसे सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। जम्मू-कश्मीर का राजनयिक दौरा ‘आंखें खोलने’ वाला केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए 24 विदेशी राजनयिकों का दल गया था। दल में शामिल इरीट्रिया के राजदूत एलेम शाव्ये ने उप राज्यपाल से मुलाकात की थी। शाव्ये ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में बदलाव नजर आता है। शाव्ये ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर का राजनयिक दौरा ‘आंखें खोलने’ वाला है और दौरे से केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर समझ बेहतर हुई है। ईयू ने जल्द विधानसभा चुनाव कराने की उम्मीद वहीं, यूरोपीय संघ ने शुक्रवार को कहा कि उसने जम्मू-कश्मीर में जिला परिषद् चुनाव और 4जी इंटरनेट सेवाओं की बहाली जैसे हाल में उठाए गए कदमों का संज्ञान लिया है। उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव कराने सहित अन्य कदम जल्द उठाए जाएंगे। यूरोपीय संघ के शीर्ष राजनयिकों के दो दिवसीय जम्मू-कश्मीर दौरे से लौटने के एक दिन बाद ईयू के एक प्रवक्ता ने यह बयान दिया। अधिकारी ने कहा कि ईयू के सभी संबंधित पक्षों से संपर्क के अभियान के तहत इस दौरे से जमीनी हकीकत देखने और स्थानीय वार्ताकारों से बातचीत करने का अवसर मिला। वैश्विक समुदाय से सहयोग की अपील जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा ने विदेशी दूतों के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि हमारे पड़ोसी देश (पाकिस्तान) द्वारा आतंकवाद के जरिए सुरक्षा स्थिति को अस्थिर करने और सामाजिक वैमनस्य भड़काने की निरंतर साजिशें किये जाने के बावजूद भी सरकार जम्मू कश्मीर में समग्र एवं न्यायसंगत विकास करने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने जम्मू कश्मीर के लिए एक नया भविष्य गढ़ने में वैश्विक समुदाय से सहयोग करने की अपील भी की थी। 18 महीने में विदेशी राजनयिकों की तीसरी यात्रा जम्मू कश्मीर के दौरे पर आए राजनयिक यूरोपीय संघ, फ्रांस, मलेशिया, ब्राजील, इटली, फिनलैंड, बांग्लादेश, क्यूबा, चिली, पुर्तगाल, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्पेन, स्वीडन, सेनेगल, ताजिकिस्तान, किर्गिजिस्तान, आयरलैंड, घाना, एस्टोनिया, बोलीविया, मलावी, इरीट्रिया और आइवरी कोस्ट से हैं। केंद्र सरकार द्वारा पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने और उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों--जम्मू कश्मीर और लद्दाख-- में विभाजित कर दिये जाने के बाद से पिछले 18 महीनों में विदेशी राजनयिकों की यह तीसरी यात्रा थी।
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