पुडुचेरी: इधर कांग्रेस का बहुमत गया, उधर किरण बेदी की छुट्टी, आखिर क्या है राज?

नई दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में कुछ बड़ा चल रहा है। ताजा घटनाक्रम को कांग्रेस के एक विधायक के इस्तीफे और उप-राज्यपाल किरन बेदी को पद से हटाए जाने तक सीमित रखकर नहीं देखा जा सकता है। लेकिन क्यों? इसका जवाब एक और घटनाक्रम में छिपा है जो दिल्ली में घटित हुआ था। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी उन्हीं विधायक महोदय जॉन कुमार के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। दोनों ने लेफ्टिनेंट गर्वनर किरण बेदी पर प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने और पद की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने राष्ट्रपति से गुहार लगाई कि बेदी को उप-राज्यपाल के पद से हटा दिया जाए। कांग्रेस को चौथा झटका और... तो क्या कुछ खेल हो रहा है? नारायणसामी अपने जिस विधायक के साथ राष्ट्रपति भवन में एलजी के खिलाफ गुहार लगाकर लौटे, वही विधायक पुडुचेरी पहुंचकर अपने पद से ही इस्तीफा दे देता है। इस कारण नारायणसामी की कुर्सी खतरे में आ जाती है क्योंकि कांग्रेस के तीन अन्य विधायक पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में सत्ताधारी दल को चौथा झटका देकर संकट में डालने से पहले जॉन कुमार का अपने सीएम के साथ राष्ट्रपति के पास पहुंचना किसी रणनीति का हिस्सा था? बेदी की बलि ली गई या बड़ा मौका कर रहा इंतजार? सवाल और भी हैं। मसलन, राष्ट्रपति बड़ी आसानी से विपक्षी दल के मुख्यमंत्री की मांग मान लेते हैं और अगले ही दिन उप-राज्यपाल की छुट्टी कर देते हैं। उससे पहले उनसे गुहार लगाने वाला सत्ताधारी विधायक भी इस्तीफा दे चुका होता है। इसे सिर्फ संयोग तो नहीं माना जा सकता है ना? तो आखिर अंदरखाने ऐसा क्या खेल चल रहा है कि दिल्ली ने किरन बेदी की बलि ले ली? हालांकि, दावा यह भी किया जा रहा है कि बेदी की बलि नहीं ली गई, उनके लिए कुछ बड़ा सोचा गया है। आखिर उन्होंने पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस का गणित जो बिगाड़ दिया। सीएम नारायाणसामी की उलझन लेकिन, मुख्यमंत्री नारायणसामी की मजबूरी समझिए। वो बेदी को हटाए जाने के फैसले की सराहना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह लोगों के अधिकारों की जीत है। कांग्रेस की छात्र इकाई ने बेदी को हटाने का स्वागत करते हुए शहर में पटाखे फोड़े। लेकिन, उनकी सरकार पर आए संकट का क्या? दरअसल, जॉन कुमार गत एक महीने में विधायक पद छोड़ने वाले कांग्रेस के चौथे नेता हैं। मौजूदा सदन में कांग्रेस नीत गठबंधन के अब 14 विधायक रह गए हैं। पुडुचेरी विधानसभा का मौजूदा हाल 33 सदस्यीय विधानसभा में अभी कांग्रेस के 10, द्रमुक के तीन, ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के सात, अन्नाद्रमुक के चार, बीजेपी के तीन (सभी नामांकित एवं मत देने का अधिकार रखते हैं) और एक निर्दलीय विधायक रह गया है। यानी, अब कांग्रेस की अगुवाई वाली वी. नारायणसामी सरकार पुडुचेरी विधानसभा में अल्पमत में आ गई है। विपक्ष ने भी इसी का हवाला देकर मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग लिया। पुडुचेरी की 33 (30 निर्वाचित + 3 नामित) सदस्यीय विधानसभा में अब विपक्ष के सदस्यों की संख्या भी 14 है। हालांकि, नारायणसामी ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार को सदन में बहुमत हासिल है। बंगाल का खेल पुडुचेरी में दुहरा रही है बीजेपी? गौरतलब है कि बेदी और नारायणसामी के बीच कई मुद्दों पर टकराव रहा है। पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया कि संभव है कि कुमार बीजेपी में शामिल हों क्योंकि माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने जिस तरह से तृणमूल नेताओं को पार्टी में शामिल कराया है, उसी को वह पुडुचेरी में दोहराएगी, हालांकि यहां पर यह बड़े पैमाने पर नहीं होगा। पिछले महीने बीजेपी अध्यक्ष जोपी नड्डा ने यहां एक रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि कांग्रेस भ्रष्टाचार में डूबी है और उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश में 30 में से 23 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता में आने का दावा किया था। कांग्रेस से विधायकों के इस्तीफे की शुरुआत पिछले महीने मंत्री ए नमास्सिवयम और ई थीप्पैनजान से हुई। बाद में दोनों बीजेपी में शामिल हो गए। मंत्री मल्लाडी कृष्णा राव ने भी सरकार से पहले इस्तीफा दिया और फिर सोमवार को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले साल जुलाई में एन धानवेलु को पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से अयोग्य करार दिया गया था। नमास्सिवयम ने नरायाणसामी पर हमला करते हुए उनपर वरिष्ठ नेताओं को दबाने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष एन रंगासामी ने मंगलवार को नारायणसामी सरकार से इस्तीफे की मांग की। ए नमास्सिवयम ने कहा कि उन्हें खुशी है कि तमिल भाषी सौंदर्यराजन को पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है और उन्होंने विश्वास जताया कि वह विकास योजनाओं को लागू करने में मदद करेंगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सौंदर्यराजन को पुडुचेरी के उपराज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। उपराज्यपाल का पदभार संभालने के बाद से उनकी यह नयी जिम्मेदारी प्रभावी हो जाएगी और वह पुडुचेरी के उपराज्यपाल की नियमित व्यवस्था होने तक इस पद पर रहेंगी।


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