ग्राउंड रिपोर्ट: मुजफ्फरनगर दंगों के 7 साल बाद बदली फिजा! जाट-मुस्लिम खाई पाट रही BKU

संजय सिंह, शामली 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे के बाद जाट और मुस्लिम समुदाय में खाई खिंच गई थी। 7 साल बीत चुके हैं और अब फिजा बदल रही है। केंद्र की मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पश्चिमी यूपी किसान आंदोलन का केंद्र बन गया है। इसमें अनाज की खरीद से जुड़ा कानून भी है। किसान एकता जिंदाबाद के नारों के बीच वेस्ट यूपी में जाट और मुस्लिम समुदाय के बीच दूरियां कम होती दिख रही हैं। जाट-मुस्लिम दोनों समाज से हैं बीकेयू पदाधिकारी पश्चिमी यूपी में एक दौर ऐसा था जब जाट और मुस्लिम समुदाय करीब थे। लेकिन वेस्ट यूपी की इस शुगर बेल्ट में 2013 के सांप्रदायिक दंगों के बाद दोनों समुदायों के बीच कड़वाहट आ गई। इसके बाद हुए चुनावों में बीजेपी को सीधा फायदा मिला। 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वेस्ट यूपी में आरएलडी की जाट-मुस्लिम केमिस्ट्री को तोड़ते हुए नया समीकरण साधा। यह सिलसिला 2019 लोकसभा चुनाव में भी जारी रहा। लेकिन किसान आंदोलन की अगुआई कर रही भारतीय किसान यूनियन (BKU) अब जाट-मुस्लिम समुदाय की खाई को पाटने का काम कर रही है। बीकेयू के पदाधिकारी जाट और मुस्लिम दोनों समाज से आते हैं। पढ़ें: विधानसभा चुनाव में साथ आएंगे दोनों समुदाय? इन सबके बीच बीजेपी भी किसानों (खास तौर से जाट समाज) तक पहुंचने की कवायद में जुटी है। शामली के बीजेपी जिलाध्यक्ष ने हमारे सहयोगी इकनॉमिक टाइम्स को बताया, 'हम उन्हें इन कानूनों के फायदे के बारे में समझाने की कोशिश कर रहे हैं।' हालांकि ईटी से बातचीत में जाट समुदाय के ज्यादातर लोगों ने माना कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि आने वाले विधानसभा चुनाव में दोनों समुदाय साथ होंगे। 'मुस्लिमों के महापंचायत में आने से अच्छा संकेत' शामली से चंद किलोमीटर दूर भैंसवाल गांव के योगेंद्र कादियान कहते हैं, 'केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ जाटों में नाराजगी है। अच्छे संकेत यह हैं कि मुस्लिम समाज के लोग भी किसान महापंचायत में शामिल हो रहे हैं।' पढ़ें: भैंसवाल गांव से रोजाना गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के लिए 100 लीटर दूध की सप्लाई होती है। गांव के हरेंद्र सिंह कहते हैं, 'जाट और मुस्लिमों के बीच आपसी भरोसे को बढ़ाने की जरूरत है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए महापंचायतें मददगार हैं।' 'किसानों के मुद्दे पर जाट-मुस्लिम एकजुट' मुस्लिम समुदाय से भी कुछ इसी तरह की आवाजें उठ रही हैं। बंटा गांव के तफरोज कहते हैं, 'इस वक्त हम किसानों से जुड़े मुद्दे को लेकर एकजुट हुए हैं। हमारी राजनैतिक एकता भविष्य का मामला है।' जाहिर है 2022 के विधानसभा चुनाव में अगर पुनर्जीवित होता है तो वेस्ट यूपी में नई सियासत का उदय हो सकता है।


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