पिछले साल दिसंबर के इन्हीं जाते हुए दिनों में मैंने अगले दस सालों की तस्वीर बहुसंख्यकवाद के दशक के रूप में खींची थी। बुनियादी प्रारूप एक साल बाद भी वही है। अंतर केवल इतना है कि अब हमारे पास उसकी संरचना के विभिन्न पहलुओं की कहीं बेहतर जानकारी है। मेरे विचार से इक्कीसवीं सदी में बीस के दशक की राजनीति मुख्य रूप से अपने पांच आयामों के लिए जानी जाएगी।
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