करगिल युद्ध के दौरान नवाज शरीफ से वाजपेयी ने की थी कई बार बात, किताब में खुलासा

नई दिल्ली के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उस वक्त के पाकिस्तानी पीएम से करीब 4-5 बार फोन पर बातचीत की थी। इस बातचीत का मकसद करगिल युद्ध से उपजे तनाव को कम करना था। इस बात का खुलासा शक्ति सिन्हा की नई किताब 'वाजपेयीः द ईयर्स दैट चेंज्ड इंडिया' में किया गया है। शक्ति सिन्हा पूर्व पीएम वाजपेयी के निजी सचिव रहे हैं। 'पाक सेना प्रमुख ने नवाज शरीफ को धोखे में रखा' किताब के मुताबिक, करगिल युद्ध को लेकर तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का मानना था कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने इस मामले में नवाज शरीफ को धोखे में रखा था। करगिल युद्ध की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच जो तनाव की स्थिति थी उसे कम करने के मकसद से वाजपेयी ने नवाज शरीफ से फोन पर बात किया था। वाजपेयी की 96वीं जयंती पर आएगी किताब शक्ति सिन्हा की यह किताब वाजपेयी की 96वीं जयंती पर बाजार में आएगी। उन्होंने वाजपेयी के नेता प्रतिपक्ष (वर्ष 1996-97) रहने के दौरान पहले उनके सचिव और 1998-99 में निजी सचिव के तौर पर काम किया था। सिन्हा ने कहा, 'आज अटल बिहारी वाजपेयी को शिद्दत से याद किया जाता है। लोग नहीं जानते कि वर्ष 1998 में उनके लिये सरकार बनाना और फिर उसे चलाना कितना मुश्किल था।' उन्होंने कहा, 'इसके बावजूद उन्होंने परमाणु परीक्षण का और विरोधाभासी तरीके से पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने का फैसला किया। करगिल का जब युद्ध हुआ तो उन्होंने कैसे साहसिक तरीके से भारत की रक्षा की और प्रधानमंत्री के तौर पर सफल होने से उन्हें रोकने के लिये कैसे उनकी सरकार गिराई गई।' इसका जिक्र किताब में है। आपको बता दें कि सिन्हा फिलहाल वडोदरा स्थित एमएस विश्वविद्यालय में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मानद निदेशक हैं। (न्यूज एजेंसी भाषा से इनपुट्स के साथ)


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