नई दिल्ली 'कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं की पूछ नहीं है और उन्हें प्रासंगिक नहीं समझा जाता।' शनिवार को गांधी परिवार के आगे कांग्रेस के कुछ नेताओं ने यही शिकायत कि ऐसा माहौल बना दिया गया है। पांच घंटे तक चली मीटिंग में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भरोसा दिया कि उनकी राय और काम को पार्टी में महत्व दिया जाता है। सोनिया के बुलावे पर इस मीटिंग में उस G-23 ग्रुप के कुछ नेता भी शामिल हुए जिन्होंने असहमतियां जताई थीं। बैठक में सीनियर बनाम जूनियर्स को लेकर बहस हुई जिसपर राहुल ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वे वरिष्ठों का सम्मान करते हैं और इनमें से कई उनके पिता के साथी रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने कहा कि वह गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, पूर्व हरियाणा सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा (सभी G-23 का हिस्सा) का बेहद सम्मान करते हैं क्योंकि वे उनके 'पिता के दोस्त' हैं जिन्होंने कांग्रेस को बनाया है। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं को सम्मान का भरोसा दिया। यह इन नेताओं संग राहुल गांधी की अगस्त के बाद पहली ऐसी मुलाकात थी। तब इन सीनियर नेताओं ने सोनिया को चिट्ठी लिखकर प्रभावी और पूर्णकालिक नेतृत्व तथा सीडब्ल्यूसी के चुनाव की मांग रखकर पार्टी के भीतर भूचाल ला दिया था। ऐसे में यह मीटिंग एक तरह से पार्टी के भीतर जारी कलह को खत्म करने की शुरुआत की तरह देखी जा रही थी। जब चिदंबरम को राहुल गांधी ने टोकामीटिंग में एक वक्त राहुल गांधी ने कहा कि RSS-BJP गवर्नेंस में इतने डूबे हैं कि जब कमलनाथ सीएम थे तो भी संघ सरकार में अपने लोगों के जरिए सरकार चलाता था। उन्होंने कहा कि कमलनाथ एक सीएम की तरह कभी काम नहीं कर पाए और सरकार 15 महीनों में गिर गई। थोड़ी देर बाद, जब चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस तमिलनाडु में होने वाले चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी तो राहुल ने टोकते हुए कहा कि पार्टी को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए और वहां पर डीएमके चुनाव लड़ रही होगी, कांग्रेस तो सहयोगी है। सीनियर नेताओं के बीच तल्खी बरकरारएक वक्त एके एंटनी ने कहा कि वे, आजाद और शर्मा और कई अन्य काफी कम उम्र में ही नेता बन गए थे और तब भी पुरानी पीढ़ी को ऐसे ही दिक्कत हुई थी। आजाद और शर्मा ने कहा कि वे कांग्रेसी ही रहेंगे और कांग्रेसी ही मरेंगे। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण का कहना था कि पार्टी को नामांकन की संस्कृति से बाहर निकलना चाहिए और वर्किंग कमिटी के चुनाव कराने चाहिए। बैठक खत्म होते-होते आजाद ने कह दिया कि अगर प्रवक्ता ने शुक्रवार को कह दिया था कि सभी मुद्दे सुलझ गए हैं तो शनिवार को इतनी लंबी चर्चा क्यों हुई। 'राहुल ने नाराज नेताओं से कहा, अब मैं मिला करूंगा'कुछ नेताओं ने राहुल गांधी से पार्टी की कमान संभालने की गुजारिश की। सूत्रों के मुताबिक, वह इस मुद्दे पर चुप रहे लेकिन कहा कि मीटिंग केवल इसी एक बात पर सीमित नहीं रखनी चाहिए। राहुल ने कड़े शब्दों में पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर बात की और बीजेपी की मजबूती का उदाहरण दिया। उन्होंने एमपी और राजस्थान को लेकर कहा कि कांग्रेस इन दो राज्यों में जीती नहीं, बल्कि बीजेपी हारी। उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जीत को असली जीत करार दिया। राहुल ने 'कम्युनिकेशन गैप' की बात करते हुए कहा कि वे उन नेताओं से नियमित तौर पर मिला करेंगे जो असहमति जताते हैं।
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