12 साल के बेघर करन अपना पेट भरने के लिए भीख मांगने को मजबूर है। फुटपाथ पर रहने वाला करन जैसे कई और बच्चे हैं जो नहीं चाहते हैं किसानों का यह आंदोलन खत्म हो। करन ने बताया कि जब से आंदोलन शुरू हुआ है, हमें मुफ्त में खाना मिल रहा है। इसलिए हमें ट्रैफिक पर खड़े होकर अब भीख नहीं मांगना पड़ रहा है।राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों का आंदोलन (Farmers Protest In Delhi) लगातार जारी है। किसान कानून खत्म करने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं जबकि सरकार बातचीत के जरिए मुद्दे को सुलझाने की कोशिश में जुटी हुई है। इस बीच, दिल्ली में भीख मांगकर खाना का जुगाड़ करने वाले बेघर बच्चों के लिए यह आंदोलन किसी खुशी से कम नहीं है। यही नहीं, वे नहीं चाहते हैं कि यह आंदोलन खत्म हो।

12 साल के बेघर करन अपना पेट भरने के लिए भीख मांगने को मजबूर है। फुटपाथ पर रहने वाला करन जैसे कई और बच्चे हैं जो नहीं चाहते हैं किसानों का यह आंदोलन खत्म हो। करन ने बताया कि जब से आंदोलन शुरू हुआ है, हमें मुफ्त में खाना मिल रहा है। इसलिए हमें ट्रैफिक पर खड़े होकर अब भीख नहीं मांगना पड़ रहा है।
बेघर बच्चों को मिल रहा खाना

चार दोस्तों के साथ सिंधु बॉर्डर पहुंचे करन यह देखने के लिए पहुंचा था कि आखिर यहां हो क्या रहा है। इसके बाद उसने वहां देखा कि यहां मुफ्त में खाना मिल रहा है। यही नहीं, इस ठंड के मौसम में सोने की अच्छी जगह भी मिल रही है। करन जैसे बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि यहां उन्हें मुफ्त भोजन मिलने लगा। उन्हें भीख मांगने की जरूरत नहीं थी।
माता-पिता की नौकरी छूटी, यहां मिल रहा खाना

कुणाल ने बताया कि उसने कभी इस तरह का खाना पहले कभी नहीं खाया था। कोरोना काल में माता-पिता की नौकरी खत्म हो गई। चौथी कक्षा में पढ़ने वाले कुणाल ने कहा कि मैं कभी इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता था। कनिका और विमल नामक बच्चों ने बताया कि वह यहां पिछले 5 दिनों से आ रहे हैं। किसान उन्हें उनके घरवालों के लिए अतिरिक्त खाना भी देते हैं।
आलू, मूली के पराठे, चाय..

श्रीराम कॉलोनी में रहने वाले कुणाल ने बताया कि उसे नाश्ते में अचार के साथ आलू, मूली और गोभी का पराठा मिलता है। साथ में चाय भी। इसके बाद लंच में दाल, कढ़ी, रोटी और चावल के साथ पकौड़ा मिलता है। रात के खाने में रोटी, सब्जी मिलती है।
20 दिनों से जारी है किसान आंदोलन

तीन कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से दिल्ली की सीमाओं के करीब किसान डटे हुए हैं। सरकार के साथ किसान नेताओं की कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन मुद्दा अभी सुलझा नहीं है। किसानों ने कहा कि वह 6 महीने का राशन-पानी लेकर यहां आए हैं सरकार से अपनी बात मनवाकर रहेंगे।
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