वॉशिंगटन/पेइचिंग किलर कोरोना वायरस के कहर से दुनियाभर में 3,93,142 लोग मारे गए हैं और करीब 67 लाख लोग इस महामारी से संक्रमित हैं। कोविड-19 महामारी से इस जंग में अब धीरे-धीरे सफलता मिलती दिख रही है। ताजा शोध में पता चला है कि गठिया रोग में दी जाने वाली दवा Acterma कोरोना मरीजों की जान बचाने में बेहद कारगर साबित हो रही है। यही नहीं कोरोना से जारी इस लड़ाई में प्लाज्मा थेरेपी भी मरीजों को जल्द स्वस्थ करने के लिए सफल हथियार बन रही है। आइए जानते हैं क्या है ताजा शोध.... चर्चित वेबसाइट medRxiv.org पर प्रकाशित ताजा शोध में कहा गया है कि गठिया रोग में दी जाने वाली दवा Acterma को देने से कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के मरने की दर घटकर आधी हो गई। गठिया रोग की दवा Tocilizumab को Acterma और RoAcemtra के नाम से बेचा जाता है। शोधकर्ता अब कोरोना के संपूर्ण खात्मे के लिए Acterma दवा को remdesivir के साथ मिलाकर देने पर विचार कर रहे हैं। मरीजों के इम्यून सिस्टम के ज्यादा सक्रिय होने से रोका वैज्ञानिकों का मानना है कि गठिया रोग में दी जाने वाली इस दवा से कोरोना वायरस के मरीजों के इम्यून सिस्टम के ज्यादा सक्रिय होने को रोका जा सकेगा। शोध के दौरान इस दवा के अच्छे परिणाम मिले हैं। दरअसल, कोरोना वायरस की कोई दवा या इलाज नहीं विकसित हुआ है। इसी वजह से वैज्ञानिक वर्तमान में मौजूद दवाओं के मिश्रण को कोरोना मरीजों पर अजमा रहे हैं। शोध के दौरान अमेरिका के मिशिगन मेडिसिन के 154 मरीजों को इसमें शामिल किया गया। 78 लोगों को Acterma दवा दी गई और बाकी बचे 76 लोगों को यह दवा नहीं दी गई। शोध में पता चला कि जिन मरीजों को गठिया रोग की दवा दी गई, उनके मरने की संभावना 45 प्रतिशत कम हो गई। शोधकर्ताओं ने माना कि जिन मरीजों की जान बची उनमें युवा ज्यादा थे। मरीजों को जल्द ठीक करने में कारगर है प्लाज्मा थेरेपी ताजा शोध में पता चला है कि प्लाज्मा थेरेपी () कोरोना वायरस से जंग में काफी मददगार साबित हो रही है। इससे सामान्य कोरोना मरीज 5 दिन पहले ही ठीक हो जा रहे हैं। हालांकि गंभीर रूप से बीमार कोरोना वायरस मरीजों की जान बचाने में प्लाज्मा थेरेपी फेल हो रही है। गंभीर मरीजों में उन मरीजों को शामिल किया जाता है जिनके कोई अंग काम करना बंद कर देते हैं या उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत होती है। शोध में पता चला है कि प्लाज्मा थेरेपी से इलाज पाने वाले कोरोना वायरस के गंभीर रूप से बीमार मरीजों के मरने की दर ज्यादा रही। चाइनीज एकैडमी ऑफ सांइस और पीकिंग यूनियन मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने यह जानकारी दी। शोध में पता चला कि ऐसे गंभीर मरीज जो बीमार तो थे लेकिन उन्हें आईसीयू की जरूरत नहीं थी, उन्हें प्लाज्मा थेरेपी देने पर ठीक होने के कुल दिनों में 5 दिन कम हो गया।
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