25 हजार करोड़ की ठगी, अब मुश्किल में पूर्व MP

लखनऊयूपी सरकार ने पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद और उनकी अलकेमिस्ट इन्फ्रा रियलिटी, अलकेमिस्ट टाउनशिप समेत अन्य कंपनियों की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश की है। सूत्रों के अनुसार टीएमसी के पूर्व सांसद और उनकी कंपनियों पर कानपुर में सैकड़ों निवशेकों के करोड़ों रुपये हड़पने का आरोप है। इस संबंध में कानपुर के कोतवाली थाना में पूर्व सांसद और उनकी कंपनियों के छह निदेशकों के खिलाफ पहले से ही एफआईआर दर्ज है। इसमें उन पर कानपुर के 291 लोगों के करोड़ों रुपये ठगने का आरोप है। हालांकि पूर्व सांसद और उनकी कंपनियों पर देश भर में करीब 25,000 करोड़ की ठगी करने का आरोप है। उनके खिलाफ कोलकाता और अन्य राज्यों में भी केस दर्ज हैं। सितंबर 2019 में दर्ज हुई थी FIRपूर्व सांसद, उनकी कंपनियों और उनसे जुड़े निदेशकों के खिलाफ कानपुर के कोतवाली थाना में पांच सितंबर 2019 को एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। चकेरी निवासी पवन मिश्रा के द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में पूर्व सांसद केडी सिंह के अलावा उनकी कंपनी के निदेशक सतेंद्र कुमार सिंह, सचेता खेमका, जय श्रीप्रकाश सिंह, बृज मोहन महाजन, छत्रपाल, नरेंद्र सिंह रानावत और नंदकिशोर सिंह को नामजद किया गया था। आरोप है कि इन लोगों ने 291 निवेशकों को मोटे मुनाफे का लालच देकर प्लॉट और अन्य चीजों में रकम लगवाई और उन्हें हड़प लिया। मामले के एक सहवादी एडवोकेट अजय टंडन इस मामले की सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पूर्व सांसद की 11 कंपनियों ने निवेशकों को लुभावनी स्कीम दिखाकर अकेले कानपुर में 10 हजार से ज्यादा लोगों से करीब 1000 करोड़ रुपये की ठगी की है। वहीं देशभर में इनकी कंपनियों ने निवेशकों से करीब 25 हजार करोड़ की ठगी की है। फर्जी कंपनियों का कई राज्यों में नेटवर्कफर्जी कंपनियों की ठगी का नेटवर्क पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली, बिहार, यूपी, मध्य प्रदेश और पंजाब तक फैला है। अजय टंडन ने नौ दिसंबर 2019 में सीएम के शिकायत पोर्टल आईजीआरएस में इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। सीएम आफिस ने गृह विभाग और डीजीपी मुख्यालय के जरिए कानपुर पुलिस से रिपोर्ट मांगी। कानपुर पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच सीबीआई को भेजी जा रही है। कानपुर पुलिस ने इसे विशेष अपराध बताते हुए कहा है कि देश भर में करीब 1 करोड़ लोगों से 25 हजार करोड़ की ठगी का मामला है इसलिए इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए। केस दर्ज कर जांच कर रहा है ईडीईडी भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज कर जांच कर रहा है। ईडी की टीमों ने 20 सिंतबर 2019 को पूर्व सांसद के कोलकाता, दिल्ली और चंडीगढ़ के सात ठिकानों पर छापेमारी की थी। उनके यहां से 32 लाख की नगदी और 10000 डॉलर की विदेशी मुद्रा भी मिली थी।


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