कासगंज उत्तर प्रदेश के 25 कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में एकसाथ नौकरी कर एक साल में एक करोड़ रुपये वेतन लेने वाली अनामिका शुक्ला के मामले में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। जिस अनामिका शुक्ला को पुलिस ने शनिवार को कासगंज से पकड़ा था, उसका असली नाम प्रिया जाटव है। अभी यह पता नहीं चला कि अनामिका शुक्ला कौन है, जिसके दस्तावेज पर प्रिया जाटव नौकरी कर रही थी। उसे किसी राज नाम के शख्स ने नौकरी दिलवाई थी। एक लाख में हुआ था नौकरी का सौदा कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की नौकरी में दस्तावेजों की जांच नहीं होती। इंटरव्यू के दौरान ही असली दस्तावेज देखे जाते हैं। चयन मेरिट से होता है। ऐसे में किसी अनामिका शुक्ला के दस्तावेजों को आधार बनाया गया, क्योंकि उसके 76 फीसदी अंक हैं। अनामिका (असली नाम प्रिया जाटव) के अनुसार, गोंडा के रघुकुल विद्यापीठ में बीएससी करते वक्त उसकी मुलाकात मैनपुरी के रहने वाले राज नाम के शख्स से हुई थी। उसने एक लाख रुपये में नौकरी दिलवाने का वादा किया। अगस्त 2018 में राज ने उसे नियुक्ति पत्र भी दिलवा दिया। इस खुलासे के बाद पुलिस राज की तलाश में भी जुटी है। ऐसे खुला मामला जब शिक्षकों का डेटाबेस तैयार किया गया तो पता चला कि अनामिका शुक्ला एक ही व्यक्तिगत विवरण के साथ पूर्णकालिक शिक्षिका के तौर पर 25 स्कूलों में कार्यरत थी। हर जगह उसके बैंक खाते में सैलरी भी पहुंच रही थी। नकली आधार से खुलवाया खाता कासगंज बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजलि अग्रवाल के मुताबिक, अनामिका शुक्ला के मूल दस्तावेजों में धुंधली फोटो घोटाले में मददगार बनी। इंटरव्यू में यह फोटो देखी जाती है, लेकिन तस्वीर धुंधली होने पर अभ्यर्थी के आधार कार्ड व अन्य पहचानपत्र के जरिए चयन किया जाता है। जिस तरह से बैंकों में अनामिका शुक्ला के नाम से खाता खुलवाया गया, उससे माना जा रहा है कि आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज फर्जी हैं। प्रिया जाटव ने अनामिका शुक्ला के नाम से कासगंज में खाता खुलवाया था। प्रिया ने बैंक खाता खुलवाने में भी फर्जी दस्तावेज का प्रयोग किया।
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