सिसकती आंखें, जुबान पर दर्द, गलियों में सन्नाटा और हड्डी में तब्दील होतीं वो खुद...ये उन गलियों के पते हैं, जहां हर ख्वाहिशमंद रात के अंधियारे में दबे पांव शरीर का भूख मिटाने जाता है। इसी भूख से समाज के इन गुमनाम चेहरों की पेट की भूख भी मिटती है। कोलकाता का सोनागाछी इलाका, मुंबई का कमाठीपुरा, दिल्ली में जीबी रोड, नागपुर की तंग गलियां...ये वही पते हैं जो कोरोना काल से पहले गुलजार हुआ करते थे। कोरोना जब लगभग पूरी दुनिया को अपनी जद में ले चुका है और भारत में लॉकडाउन की वजह से जिंदगी अब ठहर सी गई है। इन गलियों में अब चारों तरफ अजीब सन्नाटा है। हर पदचाप शरीर में सिहरन पैदा करता है। हर कोई अपने घरों में कैद है। जेहन में कई सवाल हैं। इन सवालों के समंदर में एक बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर कैसे इन सेक्स वर्कर्स की जिंदगी कट रही है?
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