महादेव की नगरी वाराणसी में मृत्यु भी उत्सव की तरह से मनाया जाता है। रंगभरी एकादशी पर पूजन के बाद धधकती चिताओं के बीच होली खेलने का दौर चलता है। डमरुओं की गूंज और भांग, पान और ठंडई की जुगलबंदी, अल्हड़ मस्ती और हुल्लड़बाजी के बीच उड़ती चिता भस्म से पूरा महाश्मशान धुंध में घिर जाता है।
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