हिंसा से किसी तरह जान बचा रहे लोगों के पास अब खाने के सामान की कमी होती जा रही है। दुकानें जला दी गई हैं या लूट ली गई हैं। रेहड़ी-पटरीवालों का सामान भी लूट लिया गया है, कुछ डर की वजह से घर से नहीं निकल रहे।
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