CAA: असम के पूर्व CM महंत की सुरक्षा पर कैंची

गुवाहाटी असम के पूर्व मुख्यमंत्री और सूबे में बीजेपी की सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) प्रमुख प्रफुल्ल कुमार महंत की सुरक्षा में कटौती कर दी गई है। एनएसजी की जेड प्लस सुरक्षा वापस लेकर अब उन्हें सीआरपीएफ की जेड प्लास (Z+) सुरक्षा दी गई है। बता दें कि मंहत नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बोलते रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इस कानून के पक्ष में वोटिंग कर उनकी पार्टी ने गलती की है और वह बीजेपी से समर्थन वापस लेने पर विचार कर रहे हैं। बता दें कि को लेकर देशभर में मचे घमासान के बीच असम में बीजेपी की सहयोगी एजीपी के तेवर तीखे बने हुए हैं। एजीपी नेता प्रफुल्ल कुमार महंत ने पिछले दिनों कहा, 'हमने नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष में वोट करके गलती की। हम असम की बीजेपी सरकार से समर्थन वापस लेने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को असम के लोगों के बारे में सोचना चाहिए और इसे यहां लागू नहीं किया जाना चाहिए। हम असम में लागू नहीं करने देंगे।' नागरिकता कानून पर लिया यू-टर्न दरअसल, नागरिकता कानून पर असम गण परिषद ने यू-टर्न ले लिया है। एनडीए में सहयोगी दल असम गण परिषद ने नागरिकता कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भी फैसला किया, जबकि पार्टी ने शुरू में इसका समर्थन किया था। बीजेपी का समर्थन करने की वजह से असम गण परिषद के तमाम नेताओं ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से विरोध प्रदर्शन जताया था। माना जा रहा है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इन्हीं विरोधों के चलते समर्थन वापस लेने का फैसला लिया है। राज्यपाल से भी मिली है उनकी पार्टी इसके बाद पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्यपाल जगदीश मुखी से भी मुलाकात की। प्रतिनिधि दल ने उनसे केंद्र से यह कहने का आग्रह किया कि राज्य में नागरिकता कानून लागू नहीं किया जाए। पार्टी अध्यक्ष अतुल बोरा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से केंद्र को यह बताने का आग्रह किया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम असम के लिए उपयुक्त नहीं है।


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