ममता को लहूलुहान करने वाला 29 साल बाद छूटा

कोलकाता करीब तीन दशक पहले पश्चिम बंगाल की मौजूदा मुख्यमंत्री पर हमला करने के आरोपी लालू आलम को सबूतों के अभाव में शहर की एक अदालत ने गुरुवार को बरी कर दिया। अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश पुष्पल सतपति ने अभियोजन की एक याचिका पर यह आदेश पारित किया। अभियोजन ने कहा कि मामले को बंद कर दिया जाए क्योंकि अब तक अंजाम पर नहीं पहुंच पाए मुकदमे का समय बीत चुका है और बीते वर्षों में कई गवाह दिवंगत हो चुके हैं। लोक अभियोजक राधाकांत मुखर्जी ने बताया कि बचाव पक्ष के वकील और आलम को सुनने के बाद अदालत ने पाया कि सबूतों के अभाव में उसे बरी किया जा सकता है। गौरतलब है कि 16 अगस्त 1990 को तब युवा कांग्रेस की नेता बनर्जी पर हमला हुआ था और वह गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। इलाज के लिए कई दिन तक उन्हें अस्पताल में रहना पड़ा था। 11 आरोपियों की मौत या लापता तत्कालीन सीपीएम (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मार्क्सिस्ट) नेता बादशाह आलम के भाई लालू आलम और अन्य के हमलों के बाद ममता बनर्जी से जुड़ा यह मामला सुर्खियों में आ गया था। मुखर्जी ने कहा कि मामले में लालू जमानत पर था जबकि 11 अन्य आरोपियों की या तो मौत हो गई या उनका पता नहीं चल पाया। लोक अभियोजक मुखर्जी ने न्यायाधीश सतपति से कहा कि घटना के 30 साल हो चुके हैं और मुकदमा किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है, इसलिए अदालत फैसला कर सकती है। लोक अभियोजक ने अदालत से यह भी कहा कि प्रक्रिया कुछ और साल तक चलती रहेगी और इससे मामले से जुड़ा हर कोई परेशान होता रहेगा ।


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