हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए दो घंटे 13 मिनट का भाषण दिया। जोरदार था ये नहीं था, जनता तय करे। हम तो भाषण के उस 10 सेकंड पर फोकस करेंगे। ये हिस्सा आया एक घंटे 35 मिनट के भाषण के बाद जब उन्होंने मणिपुर पर बोलना शुरू किया । विपक्ष वॉकआउट कर चुका था। मोदी कहते हैं- कल वैसे विस्तार से अमित भाई ने बताया है, मणिपुर में अदालत का एक फैसला आया, अब अदालतों में क्या हो रहा है वो हम जानते हैं। आपने गौर किया होगा इस हिस्से पर। समझना ज्यादा कठिन नहीं है। जब मोदी ऐसा बोल रहे थे तभी राज्यसभा में सरकार ने एक बिल पेश किया। अगर ये कानून बन गया तो चुनाव आयोग पर सरकार का कब्जा हो जाएगा। ऐसा अरविंद केजरीवाल और I.N.D.I.A वालों का कहना है। क्यों कहना है, इसे देख लेते हैं। विधेयक में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से चीफ जस्टिस को बाहर कर दिया गया है। इसी साल दो मार्च को जस्टिस केएम जोसफ की अगुआई में पांच जजों की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक पैनल बने जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया होंगे।
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