ऋषभ पंत बने टीम इंडिया पर बोझ, न रन बना रहे न जिम्मेदारी उठा रहे, रेकॉर्ड्स देख माथा घूम जाएगा

जोहानिसबर्ग बीते कुछ साल से विराट कोहली खराब फॉर्म के चलते हर किसी के निशाने पर हैं क्योंकि वह दो साल से कोई इंटरनेशनल शतक नहीं लगा पाए। चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे पर भी अंगुली उठाई जाती है। दोनों के लगातार फ्लॉप शो पर बहस होती है, लेकिन इन बड़े नामों के बीच ऋषभ पंत छिप जाते हैं। पंत भी घटिया फॉर्म से गुजर रहे हैं और उससे मिडिल ऑर्डर भी कमजोर लगने लगा है। दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में तो वह खाता तक नहीं खोल पाए। मौजूदा सीरीज में सिर्फ 59 रन बीते कुछ मुकाबलों के रेकॉर्ड्स निकालकर देखने पर समझ आएगा कि ऋषभ पंत का बल्ला भी बुरी तरह खामोश है। फैंस तो ये तक कहने से नहीं चूक रहे कि बेंच पर बैठे सीनियर विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा और युवा संजू सैमसन के साथ अन्याय हो रहा है। मौजूदा साउथ अफ्रीकी दौरे के दो टेस्ट की चार पारियों में यह खब्बू बल्लेबाज सिर्फ 59 रन ही बना पाया है। WTC फाइनल के बाद से बल्ला खामोश न्यूजीलैंड के खिलाफ पिछले साल विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल के बाद से ही ऋषभ पंत का बल्ला खामोश है। उन्होंने 13 पारी में 19.23 की बेकार औसत से सिर्फ 250 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर सिर्फ 50 रहा है। यानी पिछली 13 पारियों में वह सिर्फ एक अर्धशतक ही लगा पाए हैं। इस दौरान भारत ने इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच खेले। गैरजिम्मेदाराना तरीके से हो रहे आउट ऋषभ पंत की इमेज एक आक्रामक बैट्समैन की है। वह अपने विस्फोटक अंदाज से मैच का रुख पलटना जानते हैं, लेकिन गैरजिम्मेदाराना शॉट्स उनकी सबसे बड़ी खराबी है। जोहानिसबर्ग टेस्ट की दूसरी पारी में भी यह देखा गया। जब चार विकेट गिरने के बाद वह हनुमा विहारी का साथ देने क्रीज पर पहुंचे। दो स्लिप के साथ शॉर्ट लेग पर भी एक फिल्डर के साथ दबाव बनाया गया, लेकिन अपनी सिर्फ तीसरी ही बॉल पर छक्का मारने की फिराक में वह रबाडा का शिकार हुए।


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