डिंडोरी एमपी के डिंडोरी जिले स्थित एक गांव में आदिवासियों (MP Tribals Got Huts Under PMAY) ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फूस की झोपड़ियां दी गई हैं। वह भी रिश्वत देने के बाद मिला है। एक ग्रामीण ने आरोप लगाया कि पीएम आवास के नाम पर मुझसे चिकन लिया गया। अधिकारियों ने इसकी जांच की और कहा कि गौरा कन्हारी गांव में केवल एक घर इस स्टैंडर्ड का पाया गया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्रीय योजना के तहत बने करीब दो दर्जन घर एक ही गुणवत्ता के हैं। आदिवासी बाहुल्य इस गांव में एक हजार से कम लोग रहते हैं। डिंडोरी जिला मुख्यालय से गांव 55 किमी दूर है। यह दुर्गम क्षेत्र में आता था। सरपंच ललिया बाई के पति बुध सिंह ने मीडिया से बात की है। उन्होंने कहा कि उनके और उनके भाई के घर प्रधानमंत्री आवास योजना में शामिल हैं, लेकिन पक्की छत नहीं है। भाई प्रेम सिंह के घर में नींव भी नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रेम सिंह को घर के लिए रिश्वत देनी पड़ी है। दूसरे लाभार्थी छोटेलाल बैगा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए उन्हें कई अधिकारियों को रिश्वत देनी पड़ी और अपनी एक मुर्गी भी देनी पड़ी है। पीएम आवास में घपले की खबर जब अधिकारियों तक पहुंची तो एक जांच दल का गठन कर दिया। वहीं, टीम ने कहा कि जांच के दौरान हमें केवल एक घटिया घर मिला है। डिंडोरी कलेक्टर रत्नाकर झा ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्राम सचिव और ग्राम रोजगार सहायक को हटा दिया गया है। साथ ही रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है। गौरतलब है कि एमपी के दूसरे जिलों से भी लगातार पीएमएवाई गड़बड़ी की शिकायतें आती हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों को एक लाख 20 हजार रुपया मिलता है। इसे लेकर हमेशा आरोप लगते रहते हैं कि स्थानीय अधिकारी इसमें रिश्वत लेते हैं। कुछ दिन पहले एमपी सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सार्वजनिक मंच से भी कहा था कि मेरे सामने पीएमएवाई में रिश्वत लेने की बात सामने आ रही है। मैं किसी को छोड़ूंगा नहीं। इसके बावजूद डिंडोरी में ऐसी शिकायत सामने आई है।
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