अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर लगेगा अंकुश, सेना ने LAC तक बना दी सुरंग

नई दिल्ली ईस्टर्न लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर भारत-चीन तनाव के बीच अरुणाचल प्रदेश में सेला टनल की खुदाई का काम पूरा हो गया है। यह टनल सामरिक तौर पर काफी अहम है क्योंकि इससे भारतीय सेना को हर मौसम में एलएसी तक पहुंचने और जरूरी साजो सामान पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही वक्त की भी बचत होगी। अरुणाचल प्रदेश में कुछ दिन पहले ही चीनी सैनिक एलएसी पार कर भारतीय इलाके में घुस आए थे और उनकी भारतीय सैनिकों के साथ झड़प भी हुई थी। चीन की जहां एलएसी तक अच्छी रोड पहले से हैं वहीं अब भारत भी बॉर्डर पर तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने का काम कर रहा है। सेला दर्रा (पास) 317 किलोमीटर लंबे बालीपारा-चाहरद्वार-तवांग सड़क पर है। यह 13,800 फीट ऊंचाई पर है। यह अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग, पूर्वी कामेंग और तवांग जिलों को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता है। सेला टनल पर काम पूरा हो जाने के बाद यहां हर मौसम में आवजाही हो सकेगी और बर्फबारी में यह इलाका देश के दूसरे हिस्सों से कटेगा नहीं। एलएसी तक जाने वाला यह इकलौता रास्ता है। खराब मौसम में हेलिकॉप्टर भी उड़ान नहीं भर पाते और जब यह रास्ता हर मौसम में खुला रहेगा तो यह स्थानीय लोगों के साथ ही भारतीय सेना को बड़ी राहत देगा। पीएम नरेन्द्र मोदी ने साल 2019 में बालीपारा-चारद्वार-तवांग रोड के जरिए तवांग तक हर मौसम में सड़क संपर्क की सुविधा के लिए सेला टनल प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी। गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विस्फोट के जरिए मुख्य ट्यूब का रास्ता खोलने के लिए बटन दबाया। यह बताता है कि टनल की खुदाई पूरी हो गई है। टनल का काम पूरा होने पर यह 1.5 किलोमीटर से ज्यादा लंबी टनल 13,800 फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी डबल लेन सड़क सुरंग में से एक होगी। लेटेस्ट टेक्नॉलजी से बनी यह टनल बर्फबारी में भी प्रभावित नहीं होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की सेल टनल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती बुनियादी संरचना को मजबूत करने के सीमा सड़क संगठन (बीआओ) के प्रयासों से सशस्त्र बलों की परिचालन तत्परता बढ़ी है, दूर-दराज के क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिला है और स्थानीय आबादी के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्याधुनिक सुरंग सिर्फ तवांग ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के लिए जीवन रेखा साबित होगी।


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