प्रसार भारती का कंटेंट बिक रहा है? सांसद ने जताया ऐतराज तो CEO ने दिया यह जवाब

नई दिल्ली आजादी के पहले से लेकर आज तक आकाशवाणी, दूरदर्शन और आकाशवाणी व डीडी के समाचार विभाग के पास पुरानी व संग्रहणीय (आर्काइवल कंटेंट) सामग्री का जबरदस्त खजाना है। यूं तो समय-समय पर आकाशवाणी व दूरदर्शन अपनी इन सामग्रियों की फुटेज उपलब्ध कराता रहा है, लेकिन अब प्रसार भारती ने बाकायदा कमर्शियल तरीके से अपनी सामग्री को उपलब्ध कराने का फैसला लिया है। उसने ई-नीलामी के जरिये इसे व्यावसायिक तौर पर देने का फैसला किया है। हालांकि, सरकार के इस कदम का विरोध भी सामने आया। यह विरोध कहीं और से नहीं, बल्कि एक सांसद की ओर से आया है। सोमवार को तमिलानाडु के मदुरै के सांसद व सीपीएम नेता एस वेंकटेशन ने सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को लेटर लिखकर इस कदम का विरोध जताया। वेंकटेशन के विरोध के पीछे दलील थी कि यह कदम महज सरकार के अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्तीय घाटे को दूर करने के लिए पैसे जुटाने भर से जुड़ा नहीं है, बल्कि समाज पर इसका दीर्घकालीन दुष्परिणाम होगा। अपने लेटर में वेंकटेशन ने प्रसार भारती के कंटेंट के मुद्रीकरण (मोनेटाइजेशन) व सिंडिकेशन से जुड़ी नीति को लेकर लिए गए हालिए फैसले का जिक्र करते हुए निशाना साधा कि यह बहुत खराब बात है कि अब मुद्रीकरण इस हद तक जा पहुंचा है कि ऐतिहासिक महत्व की संग्रहणीय सामग्रियों के खजाने की मार्केटिंग शुरू हो गई है। किस तरह का जताया ऐतराज अपने लेटर में उन्होंने जिक्र किया कि पता चला है कि प्रसार भारती ने हाल ही में संविधान सभा से जुड़ी सामग्री सहित कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी सामग्री के मुद्रीकरण का फैसला किया है। उनका कहना था कि ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी सामग्री का मुद्रीकरण न सिर्फ इस देश की राजनीति पर गलत असर डाल सकती है, बल्कि यह देश के अहम व भाईचारे को भी प्रभावित कर सकती है। वेंकटेशन का कहना था कि पहले ही अपने यहां सियासी फायदों के लिए इतिहास के साथ छेड़छाड़ व उसे फिर से लिखने की कोशिशें हो रही हैं। इतिहास को हमेशा सामयिक पूर्वाग्रहों और परोक्ष फायदों से परे रखकर पेश करने की कोशिश होनी चाहिए। अतीत में ऐसी कई घटनाएं व मौके हैं, जिनका अगर बिना संदर्भ इस्तेमाल किया जाए तो देश में विभाजनकारी भावनाएं भड़क सकती हैं। ऐसे में ऐतिहासिक सामग्री तक कॉरपोरेट मीडिया की पहुंच का रास्ता खोलना कहीं से भी विवेकपूर्ण कदम नहीं माना जा सकता। सांसद ने प्रसार भारती से ऐतिहासिक महत्व की सामग्री का मुद्रीकरण न करने की अपील की है। ने दिया जवाब हालांकि, सांसद के इस पत्र के सामने आने के बाद प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पति ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा कि लगता है कि माननीय सांसद को गलत जानकारी मिली है। प्रसार भारती की हालिया नीति को गलत समझा गया है। 12 अगस्त 2021 को प्रसार भारती बोर्ड की मीटिंग में मोनेटाइजेशन व सिंडिकेशन नीति पर चर्चा हुई, जिसके आधार पर हाल ही में 8 अक्टूबर को प्रसार भारती की ओर से आकाशवाणी, दूरदर्शन व समाचार विभाग की सामग्री की ई-नीलामी के जरिये भारतीय व अंतरराष्ट्रीय चैनल, फिल्म मेकर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म को सामग्री उपलब्ध कराने का फैसला हुआ। ओटीटी के इस दौर में तमाम चैनल और प्लेटफॉर्म व कंपनियां इन दिनों ऐसे तमाम मनोरंजक व सूचनात्मक कार्यक्रम बना रहे हैं, जिनमें प्रसार भारती के इस खजाने का इस्तेमाल हो सकता है।


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