कश्मीर में बदलाव की आहट, अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का मातम नहीं मना रही घाटी!

गोविंद चौहान, श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में माहौल पूरी तरह से बदला हुआ नजर आ रहा है। की मौत के बाद कश्मीर में माहौल पूरी तरह से शांत है। कश्मीर के किसी जिले में कोई हिंसक प्रदर्शन या फिर घटना नहीं हुई है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि अब कश्मीर की अवाम को शांति पसंद आ रही है। पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने भी दो दिन पहले एक बयान में कहा था कि वह जनता का शुक्रिया करते हैं कि उन्होंने शांति बनाए रखी है। जानकारी के अनुसार, बुधवार को बीमारी के कारण गिलानी की अपने आवास पर ही मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद हालात को देखते हुए प्रशासन की तरफ से पाबंदियां लगा दी गई थीं। इसमें मोबाइल सर्विस तथा मोबाइल इंटरनेट सर्विस को सस्पेंड कर दिया गया था। माना जा रहा था कि गिलानी की मौत के बाद कश्मीर में हालात बिगड़ सकते थे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। कश्मीर में कहीं पर भी गिलानी की मौत को लेकर बवाल नहीं हुआ। इसके बाद रविवार शाम को कई पाबंदियों को हटा लिया गया। हालांकि, अभी भी कई इलाकों में पाबंदी जारी है, ताकि लोग गिलानी के निवास तक ना पहुंच सके। बाकी जिलों से आ रही रिपोर्ट के अनुसार किसी भी इलाके में लोगों ने जमा होकर बवाल नहीं किया है। गिलानी कश्मीर के एक बड़े अलगावादी नेता थे, जिनके भाषण को सुनने के लिए सैकड़ों की गिनती में लोग जमा होते थे। उनकी मौत के बाद ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला है। बुधवार को मौत होने के बाद गुरुवार को उन्हें दफना दिया गया था। प्रशासन की तरफ से इस दौरान पाबंदी लगाई गई थी। हालांकि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की तरफ से कई बयान जारी किए गए हैं लेकिन फिर भी लोग बाहर नहीं आए। पुलिस की तरफ से मौत के बाद सिर्फ एक मामला दर्ज किया गया है। गिलानी की मौत के बाद उनके जनाजे में पाकिस्तान के झंडे को लगाया गया। इसके अलावा राष्ट्र विरोधी नारे लगाए गए थे।


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