नई दिल्ली राज्यसभा में कोरोना पर चर्चा के दौरान मंगलवार को विपक्ष ने दावा किया कि केंद्र सरकार महामारी के प्रबंधन में पूरी तरह विफल रही है। विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री समस्याएं सुलझाने में फेल रहे और स्वास्थ्य मंत्री को उन्होंने बलि का बकरा बना दिया। दरअसल, वह पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की बात कर रहे थे, जिन्होंने पिछले दिनों इस्तीफा दे दिया। विपक्ष ने कहा- आंकड़े छिपाए, सत्ता पक्ष का अपना तर्क विपक्षी दलों के नेताओं ने राज्यसभा में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने कोरोना संबंधी आंकड़े छिपाए। उधर, सत्ता पक्ष ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की पुख्ता नींव और कई पहलों की वजह से इस महामारी के दौर में देश मजबूती से खड़ा रहा। ‘देश में कोविड-19 महामारी का प्रबंधन, टीकाकरण का कार्यान्वयन और संभावित तीसरी लहर को देखते हुए नीति और चुनौतियां’ विषय पर उच्च सदन में अल्पकालिक चर्चा की शुरुआत करते हुए विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कोविड-19 के नतीजे इतने भयावह होंगे, इसका अनुमान नहीं था। उन्होंने कहा, ‘लेकिन देश इस महामारी की दूसरी लहर से गुजरा और कहा जा रहा है कि हम तीसरी लहर के मुहाने पर खड़े हैं। इस महामारी से मिले घाव कभी नहीं भरेंगे।’ नोटबंदी से लॉकडाउन की तुलना उच्च सदन में विपक्ष के नेता खड़गे ने कहा, 'नोटबंदी की तरह ही लॉकडाउन की घोषणा भी रात को की गई। 24 मार्च की रात को की गई। इस घोषणा के बाद प्रवासी कामगार किस हद तक परेशान हुए, यह सबने देखा है। लॉकडाउन की घोषणा न केवल आठ से पंद्रह दिन पहले की जानी चाहिए थी बल्कि प्रवासी कामगारों को उनके गंतव्य तक पहंचाने के लिए व्यवस्था भी की जानी चाहिए थी। यह जिम्मेदारी सरकार की थी लेकिन वह विफल रही।’ अपने बनाए नियमों को खुद सरकार ने तोड़ा उन्होंने कहा, ‘अपने ही बनाए नियमों को तोड़ने का पूरा श्रेय इसी सरकार को जाता है। आपने कोरोना से बचाव के लिए मास्क पहनने और उचित दूरी का पालन करने को कहा, लेकिन खुद इसका पालन नहीं किया। आप क्या कर रहे थे पश्चिम बंगाल और दूसरे चुनावी राज्यों में। जो नियम आपने बनाया उसे तोड़ने का श्रेय भी आपको ही जाता है।’ पीएम अपने ऊपर दोष नहीं लेते, बलि का बकरा बनाते हैं उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने अपील की और लोगों ने थाली बजाई, दीया जलाया, खुद को घरों में कैद रखा लेकिन आपने उनका भरोसा तोड़ा। लोगों ने आप पर भरोसा जताया लेकिन आपने उनका भरोसा तोड़ा। उन्हें धोखा दिया। स्वास्थ्य मंत्री को आपने बलि का बकरा बनाया। प्रधानमंत्री जी अपने ऊपर कोई दोष नहीं लेते। बलि का बकरा बनाते हैं।’ नौकरियां गईं, महंगाई बढ़ी खड़गे ने कहा, ‘कोरोना के कुप्रबंधन से ना सिर्फ लोगों की नौकरियां गईं बल्कि अर्थव्यवस्था तबाह हुई। महंगाई बढ़ी। हमने लोगों के हाथों में पैसा देने को कहा था। खर्च के लिए लोगों को पैसा मिलेगा तभी वह बाजार से खरीदारी करेंगे। लेकिन हमारी इस सलाह को भी नजरअंदाज किया गया।’ उन्होंने कहा, ‘आप दावा कर रहे हैं कि इस साल दिसम्बर तक पूरे देश का टीकाकरण पूरा कर लिया जाएगा लेकिन अभी तक सिर्फ पांच प्रतिशत लोगों को ही टीकों की दोनों खुराक लगी है।’ खड़गे ने कहा कि कई बार उच्चतम न्यायालय के कहने के बाद सरकार को कदम उठाने पड़े। मैंने, (कांग्रेस अध्यक्ष) सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पत्र लिखकर अपने सुझाव भेजे लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं आया। कोरोना सिर्फ देश की ही समस्या नहीं है। इससे पूरा विश्व प्रभावित है। हम इस मामले में सरकार को सहयोग करने की पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा, ‘प्रवासी कामगार, नौकरी-रोजगार जाना, अस्पतालों में बेड-ऑक्सीजन न मिलना, लॉकडाउन और अर्थव्यवस्था का तबाह होना...। सरकार ने इस पर चिंता नहीं जताई। सरकार को विज्ञापन दिखाने में, लुभावनी बातें करने और उन्हें बार-बार दोहराने में महारत हासिल है।’ उन्होंने सरकार पर झूठे आंकड़े जारी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘सरकार दावा करती है कि कोविड-19 महामारी से करीब चार लाख लोगों की जान गई। देश में 6,38,565 गांव हैं। अगर एक एक गांव में इस महामारी ने पांच-पांच लोगों की भी जान ली है तो कोविड से मौत का आंकड़ा 31,91,825 होता है।’ खड़गे ने सवाल किया कि क्या हमेशा यह रहस्य बना रहेगा कि कोविड से कितने लोगों की जान गई?
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