इम्फालदेश की बेटी मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने ओलंपिक में भारत का झंडा बुलंद किया है। तोक्यो ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में चानू ने सिल्वर मेडल () जीता है। मीराबाई चानू के सिल्वर मेडल जीतने से पूरे देश के साथ-साथ उनके गृह राज्य मणिपुर में भी उत्सव जैसा माहौल है। उनकी जीत से खुश मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने मीराबाई चानू को वीडियो कॉल की और उनसे काफी देर बात की। मुख्यमंत्री ने मीराबाई से कहा, 'आपने जब सिल्वर जीता तब गृह मंत्री अमित शाह की नॉर्थ ईस्ट के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक चल रही थी। मैंने बैठक के बीच में आपके सिल्वर मेडल जीतने की खबर ब्रेक की। वहां मौजूद गृह मंत्री और पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्री बेहद खुश थे। गृह मंत्री अमित शाह ने माइक ऑन किया और कहा कि पूरे देश के लिए यह गौरव की बात है। इसके बाद बैठक में मौजूद सभी लोगों ने खड़े होकर आपके लिए तालियां बजाईं।' मणिपुर के CM ने कहा, 1 करोड़ रुपये देंगे और अभी से एक स्पेशल पद रिजर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, 'हम आपको 1 करोड़ रुपये पुरस्कार दे रहे हैं। आपके लिए अभी से एक स्पेशल पद रिजर्व किया जा रहा है। अब आपको ट्रेन या स्टेशन पर टिकट नहीं कलेक्ट करने पड़ेंगे। मैं आज शाम को ही गृहमंत्री से मिलकर आपके लिए बात करूंगा। बाकी चीजें सरप्राइज हैं।' दरअसल मीराबाई चानू रेलवे में टिकट कलेक्टर के पद पर तैनात हैं। मुख्यमंत्री के किए वादे के मुताबिक, राज्य सरकार उन्हें कोई बड़ा पद देने वाली है जिसके बाद उन्हें रेलवे में टीसी की जॉब नहीं करनी पड़ेगी। मीराबाई चानू ने CM से कहा, मैं आज बहुत खुश हूं मुख्यमंत्री से बात करते हुए मीराबाई चानू भी बेहद खुश नजर आईं। उन्होंने कहा, 'मैं आज बहुत खुश हूं। मणिपुर में सभी लोगों ने मेरे लिए प्रार्थना की और मैं सिल्वर मेडल जीत गई। लोग मेरे और मणिपुर के बारे में बातें कर रहे हैं, इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है। मैं सभी का शुक्रिया अदा करती हूं।' 202 किग्रा वजन उठाकर कर्णम मल्लेश्वरी को भी पीछे छोड़ा मणिपुर की 26 साल की भारोत्तोलक ने कुल 202 किग्रा (87 किग्रा + 115 किग्रा) से कर्णम मल्लेश्वरी के 2000 सिडनी ओलंपिक में कांस्य पदक से बेहतर प्रदर्शन किया। इससे उन्होंने 2016 में रियो ओलंपिक के खराब प्रदर्शन को भी पीछे छोड़ दिया जिसमें वह एक भी वैध वजन नहीं उठा सकीं थीं। करियर की इस शानदार जीत के बाद चानू ने पत्रकारों से कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं, मैं पिछले पांच वर्षों से इसका सपना देख रही थी। इस समय मुझे खुद पर गर्व महसूस हो रहा है। मैंने स्वर्ण पदक की कोशिश की लेकिन रजत पदक भी मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।’
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