नई दिल्ली 'हंगामे की बाढ़' में बहता जा रहा है। कार्यवाही न चल पाने के पीछे सरकार विपक्ष को दोषी बता रही है। वहीं, विपक्ष का कहना है कि सरकार अहम मुद्दों पर चर्चा करने से मुंह चुरा रही है। दिलचस्प यह है कि बिना चर्चा के ही विधेयक भी पास हो रहे हैं। ये अच्छे संकेत नहीं हैं। केंद्रीय मंत्री अमित शाह, प्रह्लाद जोशी और धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को संसद में व्यवधान को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। विपक्षी दलों के हंगामे के कारण सोमवार को भी संसद की कार्यवाही नहीं चल सकी। पिछले सप्ताह भी कामकाज बाधित रहा था। पेगासस जासूसी मामला, तीन कृषि कानूनों के विषय सहित कुछ अन्य मुद्दों पर विपक्षी सदस्य सरकार को घेर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा क्यों नहीं करना चाहती। आईटी पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने कहा कि सरकार ने इस सप्ताह के एजेंडे में 'पेगासस' का उल्लेख नहीं किया है। इसके अलावा वह लोकसभा में कोरोना प्रबंधन, वैक्सीन नीति और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी पर बोलना नहीं चाहती है। इन्हीं मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर सोमवार को एक बार फिर दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। इस गतिरोध के बीच प्रमुख विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने बैठक की। पेगासस जासूसी मामले पर बातचीत करने के साथ ही इस बात पर जोर दिया कि इस विषय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को पेगासस मामले पर कार्यस्थगन का नोटिस दिया। कहा कि प्रश्नकाल, शून्यकाल और दूसरे कामकाज को निलंबित किया जाना चाहिए। इस विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या की मौजूदगी में चर्चा होनी चाहिए। लोकसभा में सोमवार सुबह कुछ देर कार्यवाही चली। लेकिन, बिरला ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने को कहा, वैसे ही कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों के सदस्य अपनी-अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। कुछ सदस्यों ने अपने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं। विपक्षी सदस्य 'तानाशाही बंद करो' के नारे लगाने लगे। बिरला ने शोर-शराबे के बीच ही प्रश्नकाल की कार्यवाही को आगे बढ़ाया। इस दौरान कुछ सदस्यों ने पूरक प्रश्न पूछे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनके जवाब भी दिए। हालांकि, सदस्यों का हंगामा जारी रहा। व्यवस्था नहीं बनते देख लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। क्यों अड़ा है विपक्ष विपक्ष का साफ कहना है कि सरकार उनकी आवाज दबाना चाहती है। वह पेगासस जासूसी मामले, तीन नए कृषि कानूनों, कोरोना प्रबंधन, वैक्सीन पॉलिसी सहित कुछ अन्य मुद्दों को लेकर चर्चा चाहता है। इन मुद्दों पर राजनीति गरमाई हुई है। सोमवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ट्रैक्टर चलाकर संसद पहुंचे। उन्होंने कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि इन तमाम मुद्दों पर चर्चा से सरकार कन्नी काट रही है। पेगासस मामले पर राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आज प्राइवेसी खत्म की जा रही है। सबकी जासूसी की जा रही है। क्या राहुल गांधी और जिनकी भी जासूसी की गई, क्या वे सभी आतंकवादी हैं? क्या है सरकार का कहना? सरकार का कहना है कि विपक्ष का रवैया जिम्मेदारीपूर्ण नहीं है। वह शोर-शोराबे से बाज आए। मॉनसून सत्र की शुरुआत होने के पहले दिन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए कैबिनेट मंत्रियों का परिचय न करा पाने की परंपरा टूटने पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया था। पेगासस जासूसी मामले पर रिपोर्ट के संसद सत्र से ऐन पहले आने को लेकर सरकार ने संशय जाहिर किया था। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि यह संयोग नहीं हो सकता है कि संसद सत्र से एक दिन पहले ऐसी रिपोर्ट आए। गृह मंत्री अमित शाह ने इसके पीछे साजिश बताई थी। बिना चर्चा बिल हो रहे पारित खास बात यह है कि विपक्ष के हंगामे और शोर-शराबे के बीच बिल भी पास हो रहे हैं। संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्षी सदस्यों से सदन को चलने देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले ही पांच दिन बिना किसी काम के निकल चुके हैं। जनता का पैसा बर्बाद हो रहा है। इस दौरान लोकसभा में दो बिल बिना चर्चा के पारित हुए। यह निश्चित ही शुभ संकेत नहीं है। बिरला ने शोर-शराबा कर रहे विपक्षी सदस्यों से कहा, 'जनता ने आपको चुनकर भेजा है ताकि आप यहां उनके मुद्दे उठा सकें। लेकिन, आप नारेबाजी कर रहे हैं, तख्तियां लहरा रहे हैं।'
from India News: इंडिया न्यूज़, India News in Hindi, भारत समाचार, Bharat Samachar, Bharat News in Hindi, coronavirus vaccine latest news update https://ift.tt/3eZ5BEd