मंदिर की जमीन में घोटाले का मामला गरमाया, मानहानि का केस दायर करेगी वीएचपी!

नई दिल्ली अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट की तरफ से खरीदी गई जमीन में घोटाले का आरोप लगा है। आरोप आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह और अयोध्या के पूर्व विधायक और समाजवादी पार्टी नेता पवन पांडे ने लगाया है। विश्व हिंदू परिषद () के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि हम इस पर विचार कर रहे हैं कि हम मानहानि का दावा करें। इस बार उन्हें माफी मांगने पर न छोड़े और इसे इसकी परिणति तक ले कर जाएं। अयोध्या में वीएचपी के एक नेता ने कहा कि इस प्रकरण में सारा लेन देन बैंकों के जरिए हुआ है और नकदी के लेन देन का कोई आरोप नहीं है। उन्होंने कहा कि इस जमीन के मालिक कुसुम पाठक और हरीश पाठक है। जिन्होंने काफी पहले सुल्तान अंसारी आदि के पक्ष में अग्रीमेंट टू सेल किया था। वह पंजीकृत हुआ और उसमें जमीन का स्वीकृत मूल्य उस वक्त के बाजार भाव से दो करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि यह जमीन अयोध्या रेलवे स्टेशन के पास है और बहुत उपयोगी है। तीर्थ क्षेत्र ने इस जमीन को लेने के लिए कुसुम पाठक, सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी से बात की। इसे न तो पाठक अकेले बेच सकते थे और न ही तिवारी। सहमति यह बनी कि अग्रीमेंट टू सेल के अनुसार कुसुम पाठक इसको सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को बेच दें। इसलिए यह सौदा अग्रीमेंट टू सेल में दिए गए मूल्य के अनुसार दो करोड़ रुपये में हुआ। वीएचपी नेता के मुताबिक ट्रस्ट ने इसके मौजूदा बाजार भाव का पता लगाया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर बनने और यूपी सरकार के नए अयोध्या की चर्चा से जमीन के भाव बहुत बढ़ गए थे। ट्रस्ट ने यह पाया कि जमीन का भाव अब करीब 20 करोड़ रुपये के आसपास है। इसलिए ट्रस्ट को 18.50 करोड़ रुपये में यह सौदा करना उचित लगा। वीएचपी नेता ने कहा कि उस वक्त यह भी सोचा गया कि यह दोनों काम एक साथ ही कर लेने चाहिए। एक ही व्यक्ति स्टाम्प पेपर लेने गए इसलिए कौन सा पहले या बाद में मिला इसका कोई औचित्य नहीं है।


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