पुडुचेरी जाते ही दक्षिण में कांग्रेस 'खाली', जानें कितने राज्यों तक सिमट गई सबसे पुरानी पार्टी

नई दिल्ली पुडुचेरी में पिछले कई दिन से चल रहा राजनीतिक संकट सोमवार को कांग्रेस की सरकार गिरने के साथ ही खत्म हो गया। कांग्रेस नीत वी नारायणसामी सरकार को सदन में आज बहुमत साबित करना था। वोटिंग से पहले ही कांग्रेस और डीएमके के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद स्पीकर ने ऐलान किया कि सरकार बहुमत साबित करने में विफल रही है। पुडुचेरी में सरकार गिरने के बाद कांग्रेस ने दक्षिण भारत में कर्नाटक के बाद दूसरा राज्य गंवा दिया। कभी कांग्रेस के मजबूत गढ़ के रूप में माने जाने वाले दक्षिण भारत में आज पार्टी सभी राज्यों में सत्ता से बाहर हो चुकी है। सिर्फ पांच राज्यों में सत्ता में रह गई पार्टी 2014 में लोकसभा चुनावों में हार के बाद से कांग्रेस के सत्ता की लड़ाई में लगातार भाजपा से पिछड़ती जा रही है। पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और झारखंड को छोड़कर आज पूरे देशभर में पार्टी सत्ता से बाहर है। महाराष्ट्र और झारखंड में कांग्रेस भले ही सत्ता में हो लेकिन यहां पार्टी की भूमिका क्रमशः नंबर तीन और नंबर दो की ही है। पार्टी में अंदरुनी कलह और बदलाव की मांग कभी वटवृक्ष की तरह पूरे हिंदुस्तान में फैली पार्टी की मौजूदा हालत के लिए पार्टी के कमजोर होते संगठन और समर्पित कार्यकर्ताओं की कमी को अहम रूप से जिम्मेदार माना जा रहा है। पार्टी में अंदरुनी कलह और राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व को लेकर असंतोष सार्वजनिक हो चुका है। पार्टी के भीतर ही दो धड़े हो गए हैं। पार्टी में आंतरिक चुनाव को लेकर गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा समेत 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिख पार्टी में बड़े बदलाव की मांग की थी। 15 साल बाद बनी सरकार 15 महीनें भी नहीं टिकी मध्यप्रदेश में कांग्रेस 15 साल बाद सत्ता में लौटी थी लेकिन यह सरकार 15 महीने भी नहीं टिक पाई। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद मार्च 2020 में, के 25 विधायकों के राज्य विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा। फ्लोर टेस्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सदन में बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार नाटकीय रूप से सत्ता से बाहर हो गई। 2019 में कांग्रेस ने कर्नाटक भी गंवाया जुलाई 2019 में कांग्रेस को उस समय झटका लगा था कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के 17 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था। जब कर्नाटक में जेडीएस के साथ उनकी गठबंधन सरकार सदन में विश्वास मत साबित करने में असफल रही थी। पार्टी ने इसके लिए विधायकों के विश्वासघात को जिम्मेदार माना था। इसे कर्नाटक में भाजपा के ऑपरेशन लोटस की सफलता माना गया। इसके बाद यहां भाजपा की सरकार बनी। 15 सीटों पर उप चुनाव हुए में भाजपा ने 13 दल बदलुओं को टिकट दिया। बीजेपी ने 12 सीटों पर जीत हासिल की थी। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं चुनौती इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों में पार्टी के लिए जीत हासिल करना बड़ी चुनौती है। पश्चिम बंगाल में तो मुख्य लड़ाई इस बार भाजपा और तृणमूल के बीच ही मानी जा रही है। यहां पार्टी लेफ्ट के साथ गठबंधन में है। वहीं तमिलनाडु में पार्टी डीएमके के साथ गठबंधन के जरिये सत्ता में आने की कोशिश करेगी। केरल में पार्टी का वाम नीत एलडीएफ से मुकाबला है। असम में भाजपा को फिर से सत्ता में आने से रोकना चाहेगी। आर्थिक संकट से गुजर रही पार्टी कांग्रेस इन दिनों भारी आर्थिक संकट से गुजर रही है। पार्टी ने स्टेट में अपने नेताओं को इस संकट से जल्द निपटने के लिए कहा है। इससे पहले कांग्रेस को साल 2019-20 में 139 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा मिला था। निर्वाचन आयोग ने 2019-20 में कांग्रेस को मिले चंदे से जुड़ी एक रिपोर्ट को सार्वजनिक किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘आईटीसी’ और इससे जुड़ी कंपनियों ने 19 करोड़ रुपये से अधिक राशि चंदे में दी, जबकि ‘प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट’ ने 31 करोड़ रुपये का चंदा दिया।


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