रात में सुप्रीम कोर्ट से आया फोन, तब जाकर इंदौर जेल से रिहा किए गए मुनव्वर फारुकी

इंदौर सुप्रीम कोर्ट कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी को जमानत मिल गई थी, उसके बाद भी इंदौर जेल से उसकी रिहाई नहीं हुई थी। इंदौर से जेल रिहाई न होने के बाद कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी के परिजन फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। फिर रात में जज के फोन के बाद मुनव्वर फारुकी देर रात 11 बजे जेल से बाहर निकला है। इससे पहले जेल प्रशासन ने प्रयागराज की एक अदालत से जारी पेशी वॉरंट का हवाला देते हुए फारुकी को रिहा करने से मना कर दिया था। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जज ने इंदौर के चीफ ज्यूडिशिय मजिस्ट्रेट को फोन कर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर ऑर्डर देखने की अपील की। जिसमें एससी ने मुनव्वर को जमानत देने के साथ ही प्रोडक्शन वारंट पर रोक लगा दी थी। उसके बाद मुनव्वर फारुकी को देर रात मीडिया और लोगों की नजरों से बचाते हुए जेल से रिहा कर दिया गया है। 35 दिन से जेल में बंद था फारुकी दरअसल, मुनव्वर फारुकी पर 1 जनवरी की रात दर्ज मामले में धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी। फारुकी के वकीलों ने इंदौर की जिला अदालत में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश पेश किया। स्थानीय अदालत ने 50 हजार रुपये की जमानत और इतनी ही राशि के मुचलके पर फारुकी को जेल से रिहा करने का आदेश दिया था। गौरतल है कि बीजेपी की स्थानीय विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ के बेटे एकलव्य सिंह गौड़ की शिकायत पर एक जनवरी को गिरफ्तारी के बाद फारुकी इंदौर के केंद्रीय जेल में बंद था। जिला अदालात और एमपी में हाईकोर्ट ने फारुकी की जमानत अर्जियां खारिज कर दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। वह पिछले 35 दिनों से इंदौर जेल में बंद था।


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