नई दिल्ली भारतीय टेस्ट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर (Wasim Jaffer) ने बुधवार को उत्तराखंड क्रिकेट संघ से मतभेदों के कारण उत्तराखंड टीम के कोच के पद से इस्तीफा दे दिया था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जाफर ने मजहब के अधार पर चयन की कोशिश की, हालांकि टीम इंडिया के इस पूर्व बल्लेबाज ने इसे खारिज कर दिया है। भारत की ओर से 31 टेस्ट खेलने वाले 42 वर्षीय जाफर के समर्थन में विदर्भ टीम के खिलाड़ी उतर आए हैं। अपनी कप्तानी में विदर्भ को दो बार रणजी और ईरानी ट्रोफी चैंपियन बनाने वाले फैज फजल (Faiz Fazal) इस खबर को सुनकर हैरान हैं। 'लोकमत टाइम्स' से बातचीत में फजल ने कहा, ' इस तरह के आरोप हैरान करने वाले हैं। मैंने उनके साथ चार सीजन खेला। वह विदर्भ के सभी खिलाड़ियों के लिए बड़े भाई की तरह थे। वह सच्चे जेंटलमैन हैं। मैंने उनके बारे में किसी भी खिलाड़ी के मुंह से कोई गलत चीज नहीं सुनी है।' जाफर ने कहा कि टीम में मुस्लिम खिलाड़ियों को तरजीह देने के उत्तराखंड क्रिकेट संघ के सचिव माहिम वर्मा के आरोपों से उन्हें काफी तकलीफ पहुंची है। जाफर ने कहा, ‘जो कम्युनल एंगल लगाया, वह बहुत दुखद है। उन्होंने आरोप लगाया कि मैं इकबाल अब्दुल्ला का समर्थन करता हूं और उसे कप्तान बनाना चाहता हूं जो सरासर गलत है।’ विदर्भ की ओर से खेलने वाले विकेटकीपर अक्षय वाडकर (Akshay Wadkar) ने भी जाफर का सपॉर्ट किया है। बकौल वाडकर, ' जाफर ने चयन में हमेशा से उन खिलाड़ियों को तरजीह दी जिन्होंने प्रदर्शन किए और जो टीम में चयन के हकदार थे। मुझे नहीं लगता कि वह मजहब के आधार पर चयन करेंगे। जब वह हमारे साथ खेलते थे तब उन्होंने सभी खिलाड़ियों को एक समान देखा।' रणजी ट्रोफी में सर्वाधिक रन बना चुके जाफर ने इन आरोपों को भी खारिज किया कि टीम के अभ्यास सत्र में वह मौलवियों को लेकर आए थे। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने कहा कि बायो बबल में मौलवी आए और हमने नमाज पढ़ी। मैं आपको बताना चाहता हूं कि मौलवी, मौलाना जो भी देहरादून में शिविर के दौरान दो या तीन जुमे को आए, उन्हें मैंने नहीं बुलाया था।’
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