उत्तराखंड के चमोली जिले में आई हाल की आपदा वैज्ञानिकों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इतने कम समय में इतना ज्यादा पानी और मलबा रास्ते में सब कुछ तहस-नहस करता गुजर जाए, इसकी वजह समझना आसान नहीं है। सबसे चिंताजनक है इस आपदा का समय। फरवरी का पहला हफ्ता, जिसे पहाड़ों में सबसे सुरक्षित मौसम समझा जाता है। जंगलों में आग यहां अप्रैल-मई में ज्यादा लगती है और हिम-स्खलन (ऐवलांच) का कहर प्रायः जाड़ों में बर्फीले तूफानों के दौरान टूटता है। खौफ पैदा करने वाली पहाड़ी आपदाओं में भूकंप के अलावा बाकी सभी का समय अब तक बरसात ही माना जाता रहा है। खासकर जून, जुलाई और अगस्त के महीने।
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