पहाड़ टूटा, ग्‍लेशियर पर गिरा और लाया तबाही... एक्‍सपर्ट्स से जानें उत्‍तराखंड में क्‍यों आया सैलाब

इशिता मिश्रा और रोहन दुआ, देहरादून/नई दिल्‍ली उत्‍तराखंड में 7 फरवरी को अचानक बाढ़ क्‍यों और कैसे आई? इसका पता लगाने केा केंद्र सरकार ने पांच वैज्ञानिकों की एक टीम भेजी थी। उसके मुताबिक, एक चोटी जो 'ढीली हो गई' और एक ग्‍लेशियर जो चट्टान के ऊपर किसी तरह टिका हुआ था, उसकी वजह से आपदा आई। देहरादून स्थित वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (WIHG) की टीम मंगलवार को उस साइट पर ट्रेक करके गई और वहां का मुआयना किया। WIHG के डायरेक्‍टर कलाचंद साईं ने टीओआई से बातचीत में कहा, "हमारे शुरुआती निष्‍कर्ष के मुताबिक रविवार की घटना रॉक मॉस फेल्‍योर (चट्टान का फिसलना) और रौंठी ग्‍लेशियर इलाके में एक हैंगिंग ग्‍लेशि‍यर (ऐसा ग्‍लेशियर जो एक चट्टान के बीच में रुक जाता है) का नतीजा है। घटना का मूल दो चोटियों- रौंठी और मृगथूनी के पास था। साइंटिस्‍ट्स ने बताया, कैसे और क्‍या हुआसाईं ने कहा, "संभव है कि एक चोटी, भारी और ठोस स्‍ट्रक्‍चर, प्राकृतिक कारणों से टूटकर अलग हुआ और अपने नीचे के ग्‍लेशियर पर गिर गया जो समुद्रतल से करीब 5,600 मीटर की ऊंचाई पर था।" इससे ग्‍लेशियर के टुकड़े-टुकड़े हो गए और चट्टान के मलबे के साथ मिल गए। इसके बाद चट्टान और बर्फ का वो मिश्रण 37 डिग्री वाली तेज ढलान से 3 किलेामीटर तक नीचे आता रहा और फिर करीब 3,600 मीटर की ऊंचाई पर रौंठी गधेरा धारा से टकराया। जब वह नदी से टकराया तो एक बांध जैसा स्‍ट्रक्‍चर बन गया और बर्फबारी की वजह से कुछ समय तक टिका रहा। रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने पिछले साल 28 सितंबर से वहां जमा पानी और उन ऑब्‍जेक्‍ट्स की फोटोज लगाई हैं जब वो स्‍ट्रक्‍चर वहां नहीं था। बाढ़ से तीन दिन पहले तक, मौसम साफ रहा। इससे जमने और पिघलने का सिलसिला चलता रहा और फिर स्‍लोप फेल्‍योर हुआ। मतलब चट्टान और बर्फ का जो मिक्‍सचर जमा हो गया था, वह पिघला और उस इलाके को चीरता हुआ तपोवन घाटी की तरफ बढ़ गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें चट्टानें, पानी और बर्फ थी। चूंकि यह काफी भारी था इसलिए और हीट जेनेरेट हुई जिससे बर्फ और पिघली... सैलाब का आकार बढ़ता चला गया। एक झटके में नहीं, आपदा आने में दशकों लगे हैंक्‍या हुआ, ये तो काफी हद तक पता चल चुका है मगर वैज्ञानिक अब ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि चोटी आखिर टूटी कैसे? साईं के अनुसार, "हमारा मानना है कि चट्टान जहां से गिरी, वो एक वीक जोन बन चुका था। ऐसा कई सालों में एक बार होता है। यह अचानक होने वाली घटना नहीं है जैसा बादल फटने या 2013 केदारनाथ त्रासदी के समय हुआ था। हमने जो देखा उसे होने में दशकों लगे हैं।" उन्‍होंने कहा कि भारत के सभी 26 ग्‍लेशियर्स की लगातार मॉनिटरिंग जरूरी है। इससे में दोबारा ऐसी आपदा से बचने में मदद मिल सकती है। शुरुआत में माना गया था कि बाढ़ ग्‍लेशियल लेक के आउटबर्स्‍ट से आई है लेकिन सैटलाइट इमेजरी से पता चला कि लैंडस्‍लाइड वजह रही होगी।


from India News: इंडिया न्यूज़, India News in Hindi, भारत समाचार, Bharat Samachar, Bharat News in Hindi, coronavirus vaccine latest news update https://ift.tt/2Oqe3BV