मंगल पर अमेरिकी रोवर की सफल लैंडिंग, इसरो भी भेजेगा मार्स ऑर्बिटर मिशन-2

नासा का रोवर 'पर्सवियरंस' शुक्रवार को जैसे ही मंगल की सतह पर उतरा, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के कंट्रोल रूम में टचडाउन कन्फर्म्ड यानी 'सफलतापूर्वक उतर गया' की आवाज गूंज उठी। यह घोषणा की भारतीय मूल की अमेरिकी वैज्ञानिक स्वाति मोहन ने जिन्होंने इस पूरे मिशन में अहम भूमिका निभाई। स्वाति ने 'मार्स 2020' मिशन के दिशा-निर्देशन और कंट्रोल अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने रोवर को मंगल पर उतारने में फ्लाइट कंट्रोलर की भूमिका निभाई। नासा की वेबसाइट पर उनकी टीम की भूमिका की खासी तारीफ की गई है।

ISRO Mars Mission: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के रोवर Perseverance के मंगल ग्रह की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुंसधान संगठन (इसरो) ने भी अपने अगले मंगल मिशन (Mission Mangal) के बारे में जानकारी साझा की है।


ISRO Mission: मंगल पर अमेरिकी रोवर की सफल लैंडिंग, इसरो भी भेजेगा मार्स ऑर्बिटर मिशन-2

नासा का रोवर 'पर्सवियरंस' शुक्रवार को जैसे ही मंगल की सतह पर उतरा, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के कंट्रोल रूम में टचडाउन कन्फर्म्ड यानी 'सफलतापूर्वक उतर गया' की आवाज गूंज उठी। यह घोषणा की भारतीय मूल की अमेरिकी वैज्ञानिक स्वाति मोहन ने जिन्होंने इस पूरे मिशन में अहम भूमिका निभाई। स्वाति ने 'मार्स 2020' मिशन के दिशा-निर्देशन और कंट्रोल अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने रोवर को मंगल पर उतारने में फ्लाइट कंट्रोलर की भूमिका निभाई। नासा की वेबसाइट पर उनकी टीम की भूमिका की खासी तारीफ की गई है।



इसरो भी भेजेगा मार्स ऑर्बिटर मिशन-2
इसरो भी भेजेगा मार्स ऑर्बिटर मिशन-2

इसरो ने मार्स ऑर्बिटर मिशन-2 की अपनी अगली योजना की घोषणा की है। इसके मुताबिक, अब उसकी योजना मंगल पर एक और ऑर्बिटर मिशन भेजने की है। भारत का पहला मिशन मंगलयान था। यह किसी दूसरे ग्रह पर पहुंचने वाला भारत का पहला स्पेस मिशन था। ISRO के प्रमुख के. सिवन ने कहा कि हमारा मंगल ग्रह अभियान चंद्रयान-3 के बाद शुरू होगा।



ऑर्बिटर मिशन होगा मंगलयान-2
ऑर्बिटर मिशन होगा मंगलयान-2

अंतरिक्ष आयोग, अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों पर नीतिगत निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। यह पूछे जाने पर कि मंगलयान-2 रोवर होगा या ऑर्बिटर होगा, इसरो चीफ के. सिवन ने कहा कि अभी हम ऑर्बिटर मिशन के बारे में ही सोच रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मंगलयान-2 सिर्फ ऑर्बिटर मिशन होगा।' मंगलयान-1 नवंबर 2013 को भेजा गया था और इसने सितंबर 2014 में मंगल की कक्षा में प्रवेश किया था। यह 6 महीने काम करने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन यह अब भी, सातवें साल में भी सेवा दे रहा है।



अंतरिक्ष में भारत के नाम दर्ज हैं कई उपलब्धियां
अंतरिक्ष में भारत के नाम दर्ज हैं कई उपलब्धियां

अतंरिक्ष के क्षेत्र में भारत के नाम भी कई उपलब्धियां दर्ज हैं। भारत बेहद कम खर्च में स्पेश मिशन पूरा करने के लिए जाना जाता है। हालांकि अभी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेश यानी इसरो की प्राथमिकता चंद्रयान-3 और गगनयान हैं। इन दोनों में कोरोना के कारण देरी हुई है।



इस साल दिसंबर में लॉन्च होगा गगनयान का Unmanned Mission
इस साल दिसंबर में लॉन्च होगा गगनयान का Unmanned Mission

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बजट भाषण के दौरान भारत के महत्वाकांक्षी मिशन गगनयान का जिक्र किया था। सीतारमण ने स्पष्ट किया था कि गगनयान का मानव रहित ट्रायल इसी साल दिसंबर में होगा। बता दें कि कोरोना महामारी की वजह से गगनयान की तैयारियों पर असर पड़ा था जिसके चलते पिछले साल दिसंबर में इसका अनमैन्ड मिशन लॉन्च नहीं हो पाया था। वित्त मंत्री ने कहा था, 'गगनयान योजना के तहत चार भारतीय अंतरिक्षयात्रियों की ट्रेनिंग रूस में चल रही है । 2021 दिसंबर में अनमैन्ड मिशन जाएगा।'



इस साल की पहली छमाही में कभी लॉन्च हो सकता है चंद्रयान-3
इस साल की पहली छमाही में कभी लॉन्च हो सकता है चंद्रयान-3

जहां तक चंद्रयान-3 की बात है तो इसका प्रक्षेपण 2021 के पहली छमाही में कभी भी होने की संभावना है। चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 का ही पुन: अभियान होगा और इसमें चंद्रयान-2 की तरह ही एक लैंडर और एक रोवर होगा।' चंद्रयान-2 को पिछले साल 22 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था। इसके चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की योजना थी, लेकिन लैंडर विक्रम ने सात सितंबर को हार्ड लैंडिंग की और अपने प्रथम प्रयास में ही पृथ्वी के उपग्रह की सतह को छूने का भारत का सपना टूट गया था। अभियान के तहत भेजा गया आर्बिटर अच्छा काम कर रहा है और जानकारी भेज रहा है।





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