भारत को कितनी चाहिए कोरोना वैक्सीन की डोज और इसमें कितना आएगा खर्च, जानें सबकुछ

लंदन भारत में भी कोरोना वायरस से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन की योजना बनाई जा रही है। भारत सरकार राज्यों की मदद से लोगों तक जल्द से जल्द वैक्सीन को पहुंचाने की तैयारियों में जुटी है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन की सहयोगी संस्थान गावी (GAVI) वैक्सीन अलायंस ने बताया है कि भारत को वैक्सीनेशन के पहले चरण के लिए 103.11 अरब से 132.57 अरब रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। वैक्सीन के 60 करोड़ डोज की जरूरत कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में भारत का स्थान अमेरिका के बाद दूसरा है। भारत सरकार अगले छह से आठ महीनों में 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन की डोज दिए जाने की तैयारी में है। जिन वैक्सीनों पर भारत की नजर है उनमें एस्ट्राजेनेका, रूस के स्पुतनिक, जायडस कैडिला और स्वदेशी भारत बायोटेक शामिल हैं। इसके अलावा भारत को अपनी बड़ी आबादी के वैक्सीनेशन के लिए लगभग 60 करोड़ डोज की जरूरत होगी। भारत को खर्च करना होगा इतना पैसा गावी वैक्सीन अलायंस की मंगलवार से शुरू हुई बोर्ड की बैठक में एक प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारत को कोवैक्स फैसिलिटी के जरिए 19 से 25 करोड़ डोज मिल जाते हैं तो सरकार को बाकी के वैक्सीन की डोज के लिए 103.11 अरब रुपये खर्च करने पड़ेंगे। दूसरी ओर अगर भारत को पहले से कम 9.5 करोड़ से 12.5 करोड़ वैक्सीन की डोज दी जाती है तो उसे 132.57 अरब रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। क्या है COVAX फैसिलिटी? कोवैक्स फसिलटी कोरोना वैक्सीन को लेकर एक ग्लोबल कोलैबोरेशन है। इसका मकसद वैक्सीन डिवेलपमेंट, प्रॉडक्शन और हर किसी तक इसकी पहुंच बनाने की है। इस कोलैबोरेशन का नेतृत्व Gavi की तरफ से किया जा रहा है। Gavi एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन (CEPI) और WHO का गठजोर है। WHO की वेबसाइट पर 15 जुलाई को उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 75 देशों ने COVAX फसिलटी ज्वाइन करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट जमा किया है। COVAX का मकसद है कि सभी देशों (विकसित देशों को छोड़कर) की जरूरत का कम से कम 20 फीसदी टीके इसके जरिए सप्‍लाई हो सकें। वैक्सीन के वितरण के लिए बनाया गया COVAX अलायंस COVAX या कोविड-19 वैक्सीन को लेकर डब्लूएचओ ने गावी (ग्लोबल अलाइंस फॉर वैक्सीन्स ऐंड इम्युनिसेशन) अलायंस अभियान शुरू किया है। इसमें वास्तव में कोविड-19 के वैक्सीन को विकसित करने और उसे पूरी दुनिया में समान रूप से पहुंचाने की योजना तैयार की गई है। इसकी योजना के तहत सभी देशों और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को एक साथ एक ही प्लैटफॉर्म पर लाना है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कहा कि वर्तमान में नौ वैक्सीन उम्मीदवारों को पोर्टफोलियो में शामिल किया गया है।


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